अब मोबाइल के एक क्लिक पर मिलेंगी दुर्लभ किताबें

पहले चरण में 500 सरकारी पुस्तकालय होंगे डिजिटल
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कोलकाता : राज्य के सरकारी और प्राचीन पुस्तकालय अब डिजिटल युग में प्रवेश करने जा रहे हैं। सरकार पुस्तकालयों में मौजूद दुर्लभ और प्राचीन पुस्तकों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित कर उन्हें मोबाइल के एक क्लिक पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।

इसके तहत पाठकों को किसी पुस्तक की तलाश में पुस्तकालय जाने की जरूरत नहीं होगी। स्मार्टफोन से ही पता चल सकेगा कि किस पुस्तकालय में कौन-सी किताब उपलब्ध है और उसे डिजिटल माध्यम से पढ़ा भी जा सकेगा।

हाल ही में बीरभूम के प्राचीन विवेकानंद पुस्तकालय के 127वें स्थापना दिवस समारोह में जनशिक्षा प्रसार एवं पुस्तकालय मंत्री गौरी शंकर घोष ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले चरण में एक वर्ष के भीतर राज्य के 500 सरकारी पुस्तकालयों को डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए काम शुरू हो चुका है।

मंत्री ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में पुस्तकालयों की विरासत और संस्कृति को भुलाया नहीं जा सकता। इसलिए वहां मौजूद दुर्लभ पुस्तकों को डिजिटल करना जरूरी है, ताकि उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

डिजिटल व्यवस्था से विशेष रूप से बुजुर्गों और उन लोगों को लाभ होगा, जो किसी कारणवश पुस्तकालय नहीं पहुंच पाते। वे अपने स्मार्टफोन से घर बैठे अपनी पसंद की किताब पढ़ सकेंगे। आगे चलकर राज्य के सभी पुस्तकालयों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है।

बच्चों के लिए ई-कॉर्नर बनाने की भी तैयारी है, जहां वे कंप्यूटर और लैपटॉप जैसे उपकरणों के माध्यम से अपनी पसंद की कहानियां पढ़ सकेंगे। इस वक़्त राज्य सरकार उसी दिशा में काम करना शुरु कर दिया हैं। मंत्री का मानना हैं कि इस वर्ष के अंत तक डिजिटल का यह प्रक्रिया करीब 50 प्रतिशत से ज़्यादा पुरी होनें का सम्भावना हैं।

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