बैरकपुर में मतदाता सूची पर संग्राम: 11 लाख 'नकली' वोटरों का दावा लेकर चुनाव आयोग जाएगी भाजपा

Voter list controversy in Barrackpore: BJP to approach Election Commission claiming 1.1 million 'fake' voters.
फाइल फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बैरकपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतदाता सूची (Voter List) को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। मंगलवार को बैरकपुर सांगठनिक जिला भाजपा ने एक बड़ा दावा करते हुए आरोप लगाया कि बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली छह विधानसभा सीटों पर अब भी लगभग 11 लाख 'नकली' या फर्जी मतदाता मौजूद हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व जिला अध्यक्ष तापस घोष और भाटपाड़ा के विधायक पवन सिंह कर रहे थे, बैरकपुर अनुमंडल (एसडीओ) कार्यालय पहुँचा।

'फॉर्म 7' और एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद

भाजपा प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि 'स्पेशल इंक्वायरी रिपोर्ट' (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मतदाता सूची में भारी विसंगतियां हैं। भाजपा नेता तापस घोष ने आरोप लगाया कि उनकी टीम ने जमीनी स्तर पर जांच कर साक्ष्य जुटाए हैं, जो दर्शाते हैं कि सूची में अभी भी लाखों ऐसे नाम शामिल हैं जो या तो उस क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं या फिर वे फर्जी पहचान पर आधारित हैं। उन्होंने विशेष रूप से भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अकेले इस क्षेत्र में 28 हजार फर्जी मतदाता हैं।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जब वे इन नामों को हटाने के लिए 'फॉर्म 7' (मतदाता सूची से नाम हटाने हेतु आवेदन) लेकर संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचे, तो बीएलओ (BLO) और एईआरओ (AERO) ने इन्हें स्वीकार करने से मना कर दिया। तापस घोष के अनुसार, अधिकारी नियमों का हवाला देकर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ रहे हैं और जनता की शिकायतों को अनसुना कर रहे हैं।

राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप और भविष्य की रणनीति

विधायक पवन सिंह ने प्रशासन पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अधिकारियों का रवैया पूरी तरह से राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, "हम नियमों के दायरे में रहकर ही दस्तावेज जमा करने आए थे, लेकिन हमें सहयोग नहीं मिला।" भाजपा नेतृत्व का कहना है कि जब तक इन 11 लाख नामों का पुनरीक्षण (Review) नहीं किया जाता, तब तक निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यदि अनुमंडल स्तर पर उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो वे इस मामले को लेकर जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास जाएंगे। भाजपा ने यह भी चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर वे नई दिल्ली स्थित केंद्रीय चुनाव आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटाएंगे और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।

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