1 मार्च से नेशनल परमिट मालवाहक वाहनों के लिए VLTD अनिवार्य !

बस, मिनी बस और कैब ऑपरेटरों ने परिवहन विभाग को भेजा पत्र
VLTD mandatory for national permit goods vehicles from March 1!
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य में नेशनल परमिट वाले मालवाहक वाहनों के लिए परिवहन विभाग ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। विभाग द्वारा जारी ताजा विज्ञप्ति के अनुसार 1 मार्च 2026 से विशिष्ट श्रेणी के मालवाहक वाहनों के लिए VLTD (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) फिटमेंट जांच को फिर से अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही अब तक दी गयी अस्थायी छूट को पूरी तरह वापस ले लिया गया है। परिवहन विभाग के अनुसार, वेबेल (Webel) द्वारा विकसित बैक-एंड एप्लिकेशन अब पूरी तरह से कार्यात्मक होगा। राज्य के सभी आरटीओ (RTO) और एआरटीओ (ARTO) कार्यालयों के साथ-साथ डिवाइस निर्माताओं को भी आवश्यक 'यूजर क्रेडेंशियल' जारी कर दिये गये हैं। इससे अब गाड़ियों में लगे डिवाइस की जानकारी ऑनलाइन सत्यापित और दर्ज करना आसान हो जाएगा। जारी विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्माताओं के लिए पुरानी 'इम्पैनलमेंट' प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। अब गाड़ी मालिक किसी भी AIS-140 मान्यता प्राप्त निर्माता का चुनाव कर सकते हैं, बशर्ते उनका नाम केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के पोर्टल और वेबेल के एप्लिकेशन पर पंजीकृत हो। राज्य के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां कुल नेशनल परमिट वाहनों की संख्या 68,509 बतायी जा रही हैं जबकि डिवाइस लगी गाड़ियां 39,048 हैं। इस हिसाब से देखें तो 29,46 गाड़ियां नियम से बाहर हैं।

विभिन्न संगठनों ने की फिलहाल इसे रद्द करने की मांग

बस, मिनीबस और कैब ऑपरेटरों के विभिन्न संगठनों ने परिवहन विभाग को पत्र लिखकर फिटनेस सर्टिफिकेट (CF) के समय VLTD (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) के फिटमेंट और रिचार्ज की अनिवार्यता को फिलहाल स्थगित करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से तकनीकी खराबी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण कई वाहनों में यह डिवाइस नहीं लग पाया था। हाल ही में जारी नोटिस के माध्यम से उन्हें पता चला है कि सीएफ के समय इसे फिर से अनिवार्य किया जा रहा है, जबकि 9 फरवरी 2026 को हुई बैठक के बाद भी रिचार्ज की प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी या समाधान सामने नहीं आया है। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि चूंकि मौजूदा वाहनों में सरकार द्वारा सूचीबद्ध अलग-अलग निर्माताओं के डिवाइस लगे हैं, इसलिए जब तक रिचार्ज की प्रक्रिया पूरी तरह सामान्य और नियमित नहीं हो जाती, तब तक फिटनेस और परमिट नवीनीकरण को नहीं रोका जाना चाहिए। संगठनों ने आगामी चुनाव का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि सरकारी कार्यों के लिए बड़ी संख्या में वाहनों की जरूरत होगी, ऐसे में सामान्य परिचालन सुनिश्चित करने और परिवहन ऑपरेटरों के व्यापक हित में इस नियम को अनिवार्य न बनाया जाए।

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