मुंबई : नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट आने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिर करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की गयी लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा फिल्मी करियर रहा। उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। ‘गमन’, ‘अंकुश’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और ‘वेलकम’ जैसी 100 से ज्यादा फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभायीं थीं।
बचपन से ही बगावती तेवर
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के गांव मुरुद-जंजीरा में 1 जनवरी, 1951 को जन्मे विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया ने नाना पाटेकर के नाम से जाना। बगावती तेवर वाले नाना बचपन से ही बाकी बच्चों से अलग रहे। समाज की कुरीतियों को कला के माध्यम से दिखाना चाहते थे। इसलिए पहले थिएटर में आये, फिर फिल्मों का रुख किया। नाना अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए भी चर्चा में रहते थे। जब रवि चोपड़ा ने उन्हें रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो उन्होंने गाली दे दी थी। फिल्म परिंदा की शूटिंग के वक्त नाना और फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा भिड़ गये थे।
कैसे कैसे दिन देखे!
नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग का छोटा सा बिजनेस चलाते थे। नाना जब 13 साल के थे, तभी किसी ने पिता के साथ फ्रॉड कर दिया। रातों-रात बिजनेस चौपट हो गया। सारी संपत्ति बिक गयी। पैसे कमाने के लिए नाना को भी सड़क पर आना पड़ा। वे सुबह स्कूल जाते, शाम में फिल्म के पोस्टर पेंट करते थे। जहां पोस्टर पेंट करते थे, वहां से घर की दूरी 8 किलोमीटर थी। इस तरह दिन में 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते थे। इस काम के लिए हर महीने 35 रुपये मिलते थे। यह बात 1963 के आसपास की है। पैसों की इतनी किल्लत थी कि कभी-कभार खाना भी नसीब नहीं होता था। लंच या डिनर टाइम में नाना यूं ही अपने दोस्तों से मिलने चले जाते थे। इस उम्मीद में कि सामने से कोई दो रोटी खाने को पूछ ले।
मास्टर बगल में बिठाते, ताकि बार-बार उठना न पड़े..
नाना बचपन में बहुत शरारती थे। इतने शरारती कि टीचर इन्हें बगल में बिठाकर रखते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े। शरारत इतनी बढ़ गयी कि नाना की मां ने उन्हें छठी कक्षा के बाद अपनी बहन के गांव भेज दिया। मां को लगा कि दूसरी जगह जायेगा तो सुधर जायेगा। नाना अपनी मौसी के घर एक-दो साल रहे, फिर वापस आ आये। मौसी ने ही उन्हें वापस भेज दिया। उन्हें डर था कि नाना की संगत में कहीं उनके बच्चे ही न बिगड़ जायें।
नाटक में पत्नी नीलकांति से मुलाकात हुई
नाना पाटेकर के परिवार में अब उनकी पत्नी नीलकांति और बेटे मल्हार हैं। नाना और नीलकांति ने अपनी शादीशुदा जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। दोनों ज्यादातर समय अलग-अलग रहे, लेकिन उन्होंने कभी तलाक नहीं लिया। नाना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मुलाकात नीलकांति से नाटक ‘जात न पूछो साधु की’ के दौरान हुई थी। नीलकांति भी इस नाटक में बतौर एक्टर काम कर रही थीं। उस समय नीलकांति बैंक में अधिकारी के तौर पर नौकरी भी करती थीं। नाना ने कहा था कि वे बैंक में अधिकारी के तौर पर काम कर रही थीं। मुझे एक शो के 50 रुपये मिलते थे, जबकि उनकी सैलरी 2500 रुपये थी। 15-20 शो करने के बाद मैं सिर्फ 750 रुपये कमा पाता था।
घर संभालने के लिए अलग अलग रहे
नाना ने कहा था कि वह नीलकांति की वजह से ही इस पेशे को आगे बढ़ा सके, क्योंकि उस समय उन्हें नहीं पता था कि वह इसमें सफल होंगे या नहीं। कुछ साल बाद नीलकांति ने एक्टिंग छोड़ दी और परिवार की देखभाल करने लगीं। इस समय तक नाना और नीलकांति अलग-अलग रहने लगे थे। नीलकांति, नाना की मां और बेटे मल्हार के साथ रहती थीं, जबकि नाना अलग रहते थे।
रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो गालियां दीं
एक्ट्रेस स्मिता पाटिल ने नाना को बी आर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा था। रवि चोपड़ा उस वक्त फिल्म ‘आज की आवाज’ बना रहे थे। उन्होंने नाना को रेपिस्ट का रोल ऑफर किया। ऑफर सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां बक दीं। नाना ने कहा कि तुम मुझे ऐरा-गैरा आदमी समझते हो, क्या मैं ऐसा रोल करूंगा? यह कहकर नाना वहां से लौटने लगे। तभी स्मिता पाटिल वहां पहुंच गयीं। उन्होंने नाना और रवि दोनों को समझाया। आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम कर लिया था।
सेफ्टी गार्ड पहनने से मना किया, आग में झुलसे
फिल्म ‘परिंदा’ के क्लाइमैक्स सीन में नाना पाटेकर को आग में जलते दिखाया गया था। दुर्भाग्यवश नाना सच में आग में झुलस गये थे। इस वजह से उनकी पूरी स्किन उतर गयी थी। दरअसल उस वक्त की फिल्मों में आर्टिफिशियल फायर जैसी कोई चीज नहीं थी। सेट पर असली आग लगायी जाती थी। फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने नाना को सेफ्टी गार्ड पहनने को कहा था। नाना ने कहा था कि अगर वे सेफ्टी गार्ड पहन लेंगे तो एक्टिंग नेचुरल नहीं लगेगी। फिर भी विधु के कहने पर उन्होंने थोड़ा बहुत खुद को ढंक लिया। हालांकि, जब सीन शुरू हुआ तो आग की लपटें उनके शरीर को छूने लगीं। हाथ-पैर की स्किन झुलस गयी। मामला सीरियस हो गया। उन्हें मुंबई के नानावटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद नाना एक साल तक फिल्मों से दूर रहे।
अधिकारी ने रिस्पॉन्स नहीं दिया तो रक्षामंत्री को लगाया फोन
नाना पाटेकर बचपन से सेना में जाना चाहते थे। उनका यह सपना 1991 की फिल्म प्रहार के जरिये भी पूरा हो गया। आर्मी बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म की तैयारी के लिए नाना ने तीन साल तक आर्मी ट्रेनिंग प्रोग्राम किया था, जहां उन्हें कैप्टन की मानद रैंक दी गयी थी। उन्होंने 1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल वॉर में नाना ने भारतीय सेना को अपनी सेवाएं दी थीं। हालांकि इसके पीछे दिलचस्प कहानी है। नाना ने सेना के एक बड़े अधिकारी को फोन किया तो जवाब मिला आप सिविलियन हैं, हम आपको आर्मी में नहीं ले सकते। नाना ने तब देश के तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को फोन कर दिया। फर्नांडिस ने पहले तो मना किया, लेकिन जब नाना ने उन्हें अपना आर्मी वाला बैकग्राउंड बताया, तब मान गये। नाना कारगिल में दो महीने सेना के साथ जुड़े रहे।
‘अंकुश’ के लिए नाना ने घर गिरवी रखा
साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म ‘अंकुश’ नाना पाटेकर के करियर की अहम फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म को पूरा करने के लिए नाना ने अपने घर तक को गिरवी रख दिया था।फिल्म के डायरेक्टर एन. चंद्रा ने नाना को 10 हजार रुपये फीस पर साइन किया था। उन्हें 3 हजार रुपये एडवांस मिले थे, जबकि बाकी 7 हजार रुपये फिल्म बिकने के बाद मिलने थे। नाना उस रकम से स्कूटर खरीदना चाहते थे। शूटिंग के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर के पैसे खत्म हो गये और काम रुक गया। नाना को फिल्म की कहानी और अपने दोस्त एन. चंद्रा पर इतना भरोसा था कि उन्होंने अपना घर गिरवी रखकर करीब 2 लाख रुपये का इंतजाम किया। इस पैसे से फिल्म का काम आगे बढ़ा और ‘अंकुश’ पूरी हो सकी। फिल्म रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और नाना पाटेकर को भी पहचान मिली।
1993 मुंबई ब्लास्ट में भाई को खोया
मुंबई के 1993 बम ब्लास्ट में नाना ने अपना भाई खो दिया था। उनके भाई जिस बस में बैठे, उसी में ब्लास्ट हो गया था। बॉडी पहचान में नहीं आ रही थी। नाना के भाई हाथ में कड़ा पहनते थे। उसी से शव की पहचान हुई थी। जिसमें ब्लास्ट हुआ, उसके आगे वाली बस में नाना की पत्नी नीलकांति बैठी हुई थीं। दरअसल, नाना की पत्नी और भाई साथ ही निकले थे। दोनों एक ही बस में बैठने वाले थे, लेकिन सीट सिर्फ एक ही मिली। नाना के भाई मजबूरन पीछे वाली बस में बैठ गये। अगर उन्हें पहली बस में सीट मिल जाती तो शायद जान बच जाती।