वीजा बहाल, फिर भी बांग्लादेश जाने से डर रहे कुम्हारटोली के कारीगर

मूर्तियों को अंतिम रूप देने देश व विदेश जाते हैं कारीगर
वीजा बहाल, फिर भी बांग्लादेश जाने से डर रहे कुम्हारटोली के कारीगर
Published on

सुरक्षा की चिंता के चलते जोखिम उठाने को तैयार नहीं कारीगर

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता के प्रसिद्ध कुम्हारटोली के मूर्तिकार अपनी बेजोड़ कारीगरी के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं और उनकी बनाई मूर्तियां देश-विदेश में पूजी जाती हैं। उत्तरी कोलकाता के ये कुशल कारीगर मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए यूके, यूएसए और यूएई जैसे दूरदराज के देशों के अलावा पड़ोसी देश बांग्लादेश भी जाया करते थे। वहां कोमिला, खुलना और जेसोर जैसी जगहों पर दुर्गा की मूर्तियां तैयार करने के लिए उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता था और स्थानीय स्तर पर उनका बेहद आत्मीय स्वागत-सत्कार किया जाता था। शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में खटास आ गई, जिसका सीधा असर कुम्हारटोली के कलाकारों की आवाजाही पर पड़ा और सीमा पार जाने का रास्ता लगभग पूरी तरह बंद हो गया। हालांकि वहां राजनीतिक बदलाव के बाद हालात में कुछ सुधार हुआ है और भारतीय अधिकारियों द्वारा वीजा सेवाएं दोबारा शुरू कर दी गई हैं, इसके बावजूद कुम्हारटोली के कारीगरों के मन में डर और संकोच बरकरार है। यही वजह है कि इस बार भी वे पड़ोसी देश जाकर मूर्तियां गढ़ने को तैयार नहीं हैं।

3 साल बाद थमा कोमिला का सफर

कुम्हारटोली के एक वरिष्ठ कारीगर सनातन पाल हर साल कोमिला के एक पारंपरिक और रईस पोद्दार परिवार के लिए दुर्गा की मूर्ति बनाने जाते थे। उनका कहना है कि लगातार 3 साल तक वहां गए और पूजा से पहले अप्रैल तथा महालया के समय दो बार यात्रा करते थे, लेकिन सरकार गिरने के बाद से वे वापस नहीं लौटे हैं। इसी तरह, कुमारटुली क्ले आर्टिस्ट्स एंड कल्चर एसोसिएशन के सचिव बबलू पाल का कहना है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते अब कोई भी जोखिम मोल लेने से बच रहा है।

स्थानीय बदलाव और अनिश्चितता का माहौल

भले ही बांग्लादेश में दुर्गा पूजा की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं और सतखीरा में माचिस की तीलियों तथा रेशम के धागे से बनी अनोखी 'दशभुजा' मूर्ति आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है, फिर भी कुम्हारटोली के कारीगरों की अनुपस्थिति साफ खल रही है। सरकार बदलने के बाद भी जमीनी हालात पूरी तरह सामान्य न होने के कारण कलाकारों और आयोजकों, दोनों ही तरफ से आगे बढ़कर कोई पहल नहीं की जा रही है।

Google पर सन्मार्ग न्यूज़ पडे →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in