राधाकृष्णन या रेड्डी - कौन बनेगा उपराष्ट्रपति, आज तय होगा

उपराष्ट्रपति चुनाव : मंगलवार 9 सितंबर को होगा मतदान, बीआरएस और बीजेडी ने मतदान से बनाई दूरी
Vice Presidential Election
उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार विपक्ष के बी सुदर्शन रेड्डी और राजग के सीपी राधाकृष्णन
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नयी दिल्ली : लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य मंगलवार को अपने वोट के माध्यम से यह फैसला करेंगे कि सीपी राधाकृष्णन और बी सुदर्शन रेड्डी में से देश का अगला उप राष्ट्रपति कौन होगा। राधाकृष्णन, सत्तारूढ़ एनडीए के उम्मीदवार हैं, जिनका मुकाबला विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी से है। मतदान मंगलवार 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगा और शाम 5 बजे समाप्त होगा। मंगलवार देर शाम तक नतीजे घोषित होने की उम्मीद है। राधाकृष्णन तमिलनाडु से, जबकि रेड्डी तेलंगाना से हैं। संसद के हालिया मानसून सत्र के दौरान जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, उनका कार्यकाल दो साल बचा हुआ था।

आरएसएस से हैं राधाकृष्णन

राजग उम्मीदवार राधाकृष्णन तमिलनाडु की प्रमुख ओबीसी जाति गौंडर से आते हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि से हैं। राधाकृष्णन को 2023 में झारखंड का राज्यपाल बनाया गया था और फिर जुलाई 2024 में महाराष्ट्र भेज दिया गया था। धनखड़ भी उपराष्ट्रपति से पहले उनके जैसे ही राज्यपाल थे। वह 1998 में कोयंबटूर से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए और 1999 में वह फिर से इस सीट से लोकसभा के लिए चुने गए।

गोवा के लोकायुक्त रहे हैं रेड्डी

विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं और गोवा के लोकायुक्त रहे हैं। पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने बतौर जज रेड्डी द्वारा सलवा जुडूम पर दिए गए फैसले को लेकर निशाना साधा था। शाह ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पर नक्सलवाद का ‘समर्थन’ करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि अगर सलवा जुडूम पर फैसला नहीं आता, तो वामपंथी उग्रवाद 2020 तक ही खत्म हो गया होता।

जीत के लिए चाहिए 386 वोट : चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस और ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी इस चुनाव में किसी भी गठबंधन का समर्थन नहीं करेंगी। राज्यसभा में बीआरएस के 4 और बीजेडी के 7 सदस्य हैं। इस समय लोकसभा में 542 और राज्यसभा में 239 सांसद हैं और सभी वोट (कुल 781) डाल सकते हैं। जीत के लिए किसी भी प्रत्याशी को 391 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। लेकिन, जिस तरह बीजेडी और बीआरएस ने मतदान से अलग रहने की बात की है तो वोट डालने वाले संभावित सांसदों की संख्या घटकर मात्र 770 रह गई है। मतलब, राधाकृष्णन या सुदर्शन को जीत के लिए सिर्फ 386 सांसदों का समर्थन चाहिए।

इधर, विपक्षी नेताओं ने की बैठक : विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने उपराष्ट्रपति चुनाव से एक दिन पहले सोमवार को यहां ‘संविधान सदन’ के केंद्रीय कक्ष में बैठक कर अपनी रणनीति पर चर्चा की। बैठक में तैयारियों को पुख्ता करने के मकसद से विपक्षी सांसदों को ‘मॉक’ मतदान कराने की बात कही गई। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे विपक्षी सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करने वाले थे, लेकिन इसे अब देश में बाढ़ की स्थिति के चलते रद्द कर दिया गया।

ईवीएम का इस्तेमाल नहीं ः इस चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। ईवीएम का इस्तेमाल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यसभा और राज्य विधान परिषद चुनावों में नहीं किया जा सकता। ये मशीन सबसे ज्यादा वोट वाले उम्मीदवार को विजेता बनाती हैं। लेकिन इस चुनाव में सांसद किसी एक को वोट न देकर वरियता बताते हैं - 1, 2, 3...। यानी वे सभी उम्मीदवारों को वोट देते हैं, लेकिन अपनी पसंद के अनुरूप। इसी कारण ईवीएम उपयोग नहीं की जाती।

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