

सबिता राय
कोलकाता : आधिकारिक समारोह में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सभी छह छंद को राष्ट्रगान जन गण मन से पहले गाए जाने के केंद्र के निर्देश के बाद विधानसभा चुनाव से पहले तीखी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। तृणमूल ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर के 'जन गण मन' से पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के 'वंदे मातरम' गाने का निर्देश अचानक क्यों जारी किया गया है? राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि बंगाल में सामने चुनाव है, इसलिए यह सब किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मात्र तीन महीने के लिए ही यह निर्देशिका होगी। उसके बाद, जब ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी, तो किसी को भी इस निर्देश के ठिकाने का याद नहीं रहेगा। ब्रात्य बसु ने कहा कि हमें बंकिम चंद्र की महिमा को उजागर करने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन ऐसा करने से वास्तव में रवींद्रनाथ टैगोर काे "कमतर" दिखाने का प्रयास है। मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने नरेंद्र मोदी सरकार के निर्देश को 'विभाजनकारी रणनीति' करार दिया। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पीएम के उस मंत्तव्य पर कटाक्ष करते हुए याद दिलाया कि उन्होंने एक बार संसद में बंकिमचंद्र को "बंकिम-दा" कहा था। उन्होंने कहा, "क्या यह उस घाव पर मरहम लगाने का प्रयास है?"
क्या कहा भाजपा ने : भाजपा का कहना है कि यह केवल ऐतिहासिक गलतियों को सुधारने और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के गीत को पूरा सम्मान वापस दिलाने का प्रयास है। यह आदेश 28 जनवरी को जारी हुआ। बुधवार को अधिसूचित आदेश में गृह मंत्रालय ने कहा कि जब राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय गान साथ-साथ गाए जाएं, तो वंदे मातरम् को जन गण मन से पहले गाना अनिवार्य है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर "सांप्रदायिक तुष्टीकरण" के दबाव में वंदे मातरम् को ऐतिहासिक रूप से छोटा किए जाने का आरोप लगाया।
क्या कहा कांग्रेस ने : कांग्रेस ने भी इस आरोप को दोहराया और कहा कि इस कदम का उद्देश्य चुनाव से पहले "राजनीतिक लाभ हासिल करना" है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने इसे "विभाजन की रणनीति" करार दिया।