SIR के बीच वंदे भारत की सियासत, मतुआ बेल्ट पर मोदी की रेल सौगात

दिखाएंगे नयी ट्रेन को हरी झंडी
SIR के बीच वंदे भारत की सियासत, मतुआ बेल्ट पर मोदी की रेल सौगात
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केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले जहां SIR के जरिए मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज है, वहीं CAA को लेकर मतुआ समुदाय की चिंताएं और सीमावर्ती इलाकों में विकास बनाम राजनीति की बहस भी केंद्र में है। इसी पृष्ठभूमि में मालदह एक ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राज्य को देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात मिलने जा रही है।

18 जनवरी को मालदह से दिखाएंगे नयी ट्रेन को हरी झंडी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जनवरी को मालदह के नित्यानंदपुर में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसी मंच से वे एक साथ दो ट्रेनों का उद्घाटन करेंगे—

हावड़ा–गुवाहाटी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन और कामाख्या एक्सप्रेस, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही इस परियोजना को ऐतिहासिक बताते हुए इसकी घोषणा कर चुके हैं।

मतुआ बेल्ट में रेल परियोजना के खास मायने

हावड़ा से गुवाहाटी जाने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का सीधा असर मतुआ-बहुल ज़िलों पर पड़ेगा।

इनमें प्रमुख हैं—

नॉर्थ 24 परगना (बनगांव, गायघाटा, बागदा, बशीरहाट), साउथ 24 परगना (कैनिंग, भांगड़), नदिया (शांतिपुर, कृष्णानगर, राणाघाट)।

इन इलाकों को राजनीतिक रूप से ‘मतुआ कॉरिडोर’माना जाता है।

SIR के बीच विकास बनाम राजनीति

जहां एक ओर SIR को लेकर नागरिकता, पहचान और मतदाता सूची पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार इस रेल परियोजना को कनेक्टिविटी और विकास का प्रतीक बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसका चुनाव से पहले मतुआ और सीमावर्ती मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।

रेल सुरक्षा पर तृणमूल के सवाल

हालांकि आम यात्रियों में उत्साह है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने रेलवे सुरक्षा को मुद्दा बनाया है। मंत्री सबीना यास्मीन के फर्स्ट क्लास कोच से सामान चोरी की घटना का हवाला देते हुए पार्टी ने स्टेशन और ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

चुनाव से पहले मालदह बना रणनीतिक केंद्र

एक तरफ ऐतिहासिक रेल परियोजना, दूसरी ओर SIR, CAA और सुरक्षा को लेकर सियासत— मालदह अब सिर्फ रेलवे मानचित्र पर नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति के केंद्र में भी आ चुका है।


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