

वॉशिंगटन/तेहरान : अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर ताजा सैन्य कार्रवाई का आरोप लगाया है, जिससे पहले से नाजुक युद्धविराम और कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। तीन महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक वार्ताएं भी फिलहाल ठहराव की स्थिति में हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि सप्ताहांत में ईरान के खाड़ी तटीय क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उड़ रहे अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने के जवाब में की गई।
वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि उसने उस अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया, जिसका इस्तेमाल दक्षिणी ईरान पर हमले के लिए किया गया था। हालांकि, ईरान ने संबंधित एयरबेस का नाम सार्वजनिक नहीं किया।
इस बीच कुवैत में भी सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, देश के एयर डिफेंस सिस्टम ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट किया। पूरे देश में सायरन बजने की खबरें सामने आई हैं। कुवैत में अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य अड्डा स्थित है।
कूटनीतिक मोर्चे पर भी हालात जटिल बने हुए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन चाहता है कि हिजबुल्लाह सबसे पहले अपने हमले बंद करे ताकि व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
दूसरी ओर, ईरान के मुख्य वार्ताकार ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि तेहरान किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा, जो ईरान के अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित न करे। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने एक और अधिक सख्त प्रस्ताव रखा है, हालांकि उसके विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमेरिका की प्राथमिकताओं में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर रखा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को आरोप लगाया कि अमेरिका लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
उधर, इजरायली सेना ने भी दक्षिणी लेबनान में एक सैनिक के मारे जाने की पुष्टि की है। सेना के अनुसार, स्टाफ सार्जेंट एडम त्जारफाती की मौत युद्ध के दौरान हुई। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वह हिजबुल्लाह के ड्रोन हमले का शिकार बने।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई, परमाणु कार्यक्रम पर मतभेद और लेबनान में बढ़ते संघर्ष के कारण अमेरिका-ईरान वार्ता गंभीर संकट में पहुंच गई है। ऐसे में क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका फिर से बढ़ने लगी है।