US-ईरान जंग तेज! खामेनेई के गृह शहर मशहद में अमेरिकी हमला, दो पुल तबाह

जनाजे से पहले एयरस्ट्राइक का दावा, ईरान ने ट्रंप पर लगाया निशाना साधने का आरोप; जेडी वेंस ने दी कड़ी चेतावनी
US-ईरान जंग तेज! खामेनेई के गृह शहर मशहद में अमेरिकी हमला, दो पुल तबाह
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तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच लगातार हमलों के बीच दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान के मशहद शहर में दो अहम पुलों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। मशहद ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का गृह शहर है, जहां गुरुवार (9 जुलाई) को उनके अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है।

ईरान ने इस हमले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खामेनेई के अंतिम संस्कार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, मशहद में एक होटल पर लगे बैनर की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिन पर अंग्रेजी में "We Will Kill Trump" लिखा दिखाई दे रहा है। इससे ईरान में अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ बढ़ते गुस्से का संकेत मिल रहा है।

इधर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी बलों ने अमेरिका के नौसैनिक ठिकानों के आसपास कई हमले किए हैं और अन्य रणनीतिक स्थानों को भी निशाना बनाया है।

इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान ने व्यावसायिक जहाजों पर हमले फिर शुरू कर हालिया समझौते का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की तो अमेरिका उसका कड़ा जवाब देगा।

युद्ध का असर अमेरिका पर भी दिखाई दे रहा है। ABC News की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिकी वायुसेना के 30 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए गए हैं। प्रत्येक MQ-9 रीपर ड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) बताई जाती है। ऐसे में अमेरिका को अरबों डॉलर का सैन्य नुकसान होने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, युद्ध से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। दोनों देशों की ओर से लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर डाल सकता है।

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