

कोलकाता : महानगर में तैनात अमेरिकी कांसुल जनरल कैथी गाइल्स-डियाज ने शुक्रवार को परोक्ष रूप से चीन को कड़ा संदेश देते हुए मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन किया। इस दिन 'इंडो-पैसिफिक: नॉर्थ ईस्टर्न डायलॉग' में भाग लेते हुए उन्होंने कहा, 'अमेरिका एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध है, जहां व्यापार बिना रुकावट हो, हर देश की संप्रभुता बनी रहे और कोई भी देश बल या आर्थिक दबाव के जरिए दूसरे देशों को दबाने की कोशिश न करे।' उन्होंने यह भी कहा कि कोलकाता ऐतिहासिक रूप से बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार रहा है। आज जब भारत इंडो-पैसिफिक में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, तब देश का पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र एक बार फिर वैश्विक व्यापार का प्रमुख केंद्र बन रहा है।
उत्तर-पूर्वी राज्यों की व्यापारिक कनेक्टिविटी पर जोर
दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद महासागर तक फैले विशाल समुद्री क्षेत्र में मुक्त व्यापार और रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका अब भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (नॉर्थ ईस्ट इंडिया) को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा है। यह संदेश शुक्रवार को कोलकाता स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (यूएस कांसुलेट) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के संयुक्त आयोजन में ‘यूएस स्ट्रैटेजिक फ्रेमवर्क फॉर द इंडो-पैसिफिक: नॉर्थ ईस्टर्न डायलॉग – कोलकाता चैप्टर’ में रखा गया। इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की व्यापारिक कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया। असम, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा सहित उत्तर-पूर्व भारत के विभिन्न राज्यों से आए 30 प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया।
मोदी से सहमत ट्रंप, भारत-अमेरिका के रिश्ते और मज़बूत
दिल्ली में हाल ही में नियुक्त नए अमेरिकी राजदूत का उल्लेख करते हुए कैथी ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध इस समय अपने सर्वोच्च स्तर पर हैं। उनके अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई अहम मुद्दों पर एकमत हैं, विशेष रूप से एक मजबूत, संप्रभु और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण को लेकर। इसी आपसी समझ के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा सहयोग को नयी गति मिल रही है।
उत्तर-पूर्व भारत क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
चर्चा में यह बात उभरकर सामने आयी कि उत्तर-पूर्व भारत के वास्तविक विकास के लिए केवल सड़क और रेल ही नहीं, बल्कि जलमार्ग (वॉटरवेज) और डिजिटल कॉरिडोर भी बेहद जरूरी हैं। वक्ताओं ने कहा कि सप्लाई चेन के लिए किसी एक देश (यानी चीन) पर अत्यधिक निर्भरता कम करना और “शत्रुतापूर्ण सप्लाई चेन” से बचना आज की बड़ी आवश्यकता है।
भारत का नॉर्थ ईस्ट बना अमेरिका की कुंजी
बताया गया कि इससे पहले मेघालय, असम, सिक्किम, त्रिपुरा, मिजोरम और मणिपुर में क्षेत्रीय स्तर पर कई नीति संवाद आयोजित किए गए थे। 'कोलकाता चैप्टर' में हुई चर्चा के निष्कर्षों को लेकर आगामी मार्च महीने में नयी दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्तर की अंतिम बैठक होगी। उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीतियां तय की जाएंगी।