ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम सप्लाई पर मुहर, PM मोदी ने किया ऐतिहासिक समझौता

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर न्यूक्लियर एनर्जी, स्पेस और इंडो-पैसिफिक सहयोग को मिली नई रफ्तार, 2047 के ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बड़ा सहारा
ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम सप्लाई पर मुहर, PM मोदी ने किया ऐतिहासिक समझौता
Published on

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सप्लाई को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा मिशन के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों के अनुरूप ऑस्ट्रेलिया भारत को केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम की आपूर्ति करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि यह व्यवस्था दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग को मजबूत करेगी और भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नई गति देगी।

ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के करीब 28 प्रतिशत यूरेनियम भंडार हैं। हालांकि वह स्वयं परमाणु ऊर्जा या परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करता और अपने यूरेनियम का निर्यात करता है। भारत के लिए यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिससे करोड़ों घरों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी।

भारत में बिजली की बढ़ती मांग और सीमित घरेलू यूरेनियम संसाधनों को देखते हुए यह समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। वर्तमान में भारत के कुल बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत है और इसका एक बड़ा कारण यूरेनियम की सीमित उपलब्धता रही है।

दोनों देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके तहत हिंद महासागर में ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा, जिससे भारत के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और सैटेलाइट मिशनों को तकनीकी सहायता मिलेगी।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि यह व्यवस्था भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम के निर्यात को आसान बनाएगी और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "न्यूक्लियर एनर्जी पर हुआ यह समझौता भारत के क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को नई गति देगा और ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करेगा।"

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी, इंडो-पैसिफिक सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in