

तेहरान : अमेरिका के साथ प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर ईरान में राजनीतिक घमासान बढ़ गया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयान के बाद कट्टरपंथी गुटों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्रालय के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अराघची के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने "अराघची इस्तीफा दो" और "बेइज्जती करने वाले अराघची मुर्दाबाद" जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते में ईरान ने जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं। कट्टरपंथी गुटों का कहना है कि यह डील देश के रणनीतिक हितों को कमजोर कर सकती है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ को प्रभावित कर सकती है।
विवाद तब तेज हुआ जब विदेश मंत्री अराघची ने सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि प्रस्तावित समझौते में अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का प्रावधान शामिल है।
उन्होंने कहा कि समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट का संचालन पहले जैसा नहीं रहेगा, हालांकि इसे ईरान की रणनीतिक क्षमता का हिस्सा भी बताया।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में दावा किया गया कि राजधानी तेहरान में भी विदेश मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने विदेश मंत्री अराघची के साथ-साथ संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के खिलाफ भी नारे लगाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के अधिकारियों की ओर से दावा किया गया है कि शांति समझौता जल्द अंतिम रूप ले सकता है। हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने तत्काल समझौते की संभावना से इनकार किया है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि समझौता "कल नहीं होगा", लेकिन आने वाले दिनों में बातचीत आगे बढ़ सकती है।
अमेरिका-ईरान समझौते पर अब पूरी दुनिया की नजर है, क्योंकि इसका असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।