

कोलकाता : तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और भारी हंगामे के बीच गुरुवार को विधानसभा के विशेष अधिवेशन में बहुचर्चित 'द वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजेस (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) (अमेंडमेंट) बिल, 2026' पारित हो गया। मतदान में बिल के पक्ष में 171 और विपक्ष में 15 वोट पड़े। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने विरोध में वॉकआउट किया, जबकि कालीघाट तृणमूल, कांग्रेस, माकपा और आईएसएफ के विधायकों ने बिल के खिलाफ मतदान किया।
बहस के दौरान विपक्ष ने सबसे बड़ा सवाल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और तबादले की शक्ति के संभावित दुरुपयोग को लेकर उठाया। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यदि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य या प्रतिशोध के लिए नहीं किया जाता है, तो उनकी पार्टी सैद्धांतिक रूप से इसका विरोध नहीं करेगी। हालांकि, उन्होंने प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होने की आशंका जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं इसके जरिये नया ‘गेरुआकरण’ थोपने की कोशिश तो नहीं होगी।
आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने बिल के औचित्य और इसके संभावित दुरुपयोग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इसे इतनी जल्दबाजी में लाने की जरूरत क्या थी। माकपा विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने भी इसी मुद्दे पर सरकार को घेरा। दोनों ने आशंका जताई कि प्रशासनिक तबादले की शक्ति भविष्य में राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार बन सकती है। कालीघाट तृणमूल विधायक अलिफा अहमद ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए तबादला ही एकमात्र रास्ता नहीं है।
इसी दौरान ऋतब्रत खेमे के विधायक अखरुज्जमां ने जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की टिप्पणी और सरकार की ‘गेरुआ सम्मान यात्रा’ के आयोजन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों में राजनीतिक रंग चढ़ाने की कोशिश हो रही है। उनकी टिप्पणी के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार नोकझोंक शुरू हो गई और सदन में भारी हंगामा हुआ।
ऋतब्रत गुट के विधायक प्रसून बनर्जी ने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालयों के अपने कानून और सेवा नियम हैं। ऐसे में सरकार की आलोचना करने वाले किसी शिक्षक को दूसरे विश्वविद्यालय में भेजे जाने पर गंभीर विवाद पैदा हो सकता है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य कमजोर विश्वविद्यालयों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने उच्च शिक्षा में पहले ‘अनिलीकरण’ और बाद में ‘ममतायीकरण’ का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार ऐसा कुछ नहीं करेगी।
उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि स्वायत्तता के नाम पर कुप्रबंधन या मनमानी स्वीकार नहीं होगी। सरकार के अनुसार, संशोधन से प्रशासनिक जरूरत के आधार पर एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में शिक्षक और कर्मचारियों के तबादले का रास्ता खुलेगा।