टीएसजी फाउंडेशन ने मरीजों के लिए की मेडिकल स्टे सुविधा की घोषणा

द्वीपों से आने वाले मरीजों के लिए बड़ी पहल
टीएसजी फाउंडेशन ने मरीजों के लिए की मेडिकल स्टे सुविधा की घोषणा
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टीएसजी फाउंडेशन शुरू करेगा मेडिकल स्टे की सुविधा

रेफरल मरीजों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का होगा समाधान

इलाज के बाद ठहराव की कमी पर फोकस

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : टीएसजी फाउंडेशन ने उत्तर एवं मध्य अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह से इलाज के लिए श्री विजयपुरम आने वाले मरीज़ों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक समर्पित मेडिकल स्टे सुविधा शुरू करने की घोषणा की। यह पहल लंबे समय से महसूस की जा रही उस कमी को पूरा करने के उद्देश्य से की गई है, जो रेफरल के बाद मरीजों के ठहरने, देखभाल और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं के रूप में सामने आती रही है। पत्रकारों को संबोधित करते हुए टीएसजी फाउंडेशन के चेयरमैन श्री टीएसजी भास्कर ने बताया कि यह पहल उन कठिनाइयों को देखते हुए शुरू की गई है, जिनका सामना रेफरल पर मुख्य भूमि अथवा श्री विजयपुरम के चिकित्सा केंद्रों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज का खर्च तो वहन किया जाता है, लेकिन इलाज के बाद ठहरने, भोजन और देखभाल जैसी आवश्यकताओं की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होती। भास्कर ने पूर्व की रेफरल योजनाओं और आयुष्मान भारत योजना के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि पहले की योजनाओं में यात्रा, ठहराव, जांच, सर्जरी और ऑपरेशन के बाद की देखभाल तक का प्रावधान था, जबकि आयुष्मान भारत योजना में मुख्य रूप से केवल इलाज का खर्च शामिल है। इसके कारण दूरदराज़ द्वीपों से आने वाले मरीजों को जांच, आवास, भोजन और वापसी यात्रा पर भारी खर्च उठाना पड़ता है।

उन्होंने आगे बताया कि कार निकोबार तथा उत्तर एवं मध्य अंडमान से आने वाले कई मरीज बिना किसी संस्थागत सहयोग के श्री विजयपुरम पहुंचते हैं। अस्पतालों में बिस्तरों की कमी और डायलिसिस व गंभीर रोगियों की बढ़ती संख्या के चलते डिस्चार्ज होने के बाद मरीजों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है, जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए टीएसजी फाउंडेशन ने जी बी पंत अस्पताल से लगभग 750 मीटर की दूरी पर 190 वर्ग मीटर का भूखंड खरीदा है। इस पर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा और एक ब्लॉक के आठ से नौ महीनों में पूरा होने की संभावना है। परियोजना के पूर्ण होने पर इस सुविधा में 11 कमरे होंगे, जिनमें एक समय में 22 मरीज ठहर सकेंगे। इसके अलावा एक साझा रसोई और दूसरी मंजिल पर एक बड़ा सामुदायिक हॉल भी बनाया जाएगा, जो विशेष रूप से निकोबार के मरीजों की सामुदायिक जीवनशैली को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इस सुविधा का संचालन एक समर्पित समिति द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाएगा, जबकि टीएसजी फाउंडेशन मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेगा। रखरखाव और संचालन खर्च के लिए नाममात्र का दैनिक शुल्क प्रस्तावित किया गया है। जन सहयोग की अपील करते हुए श्री भास्कर ने विश्वास जताया कि यह सुविधा 10 से 11 महीनों के भीतर पूरी तरह कार्यशील हो जाएगी और द्वीपों के मरीजों व उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।

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