ट्रंप ने अब भारत के निकट द्वीप समूह को लेकर खोला मोर्चा

चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आलोचना किए जाने के बाद हैरत में पड़ी ब्रिटिश सरकार ने मंगलवार को अपने निर्णय का बचाव किया। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने ब्रिटेन के इस फैसले का समर्थन किया था।
ट्रंप ने अब भारत के निकट द्वीप समूह को लेकर खोला मोर्चा
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लंदनः हिंद महासागर में भारत के निकट चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आलोचना किए जाने के बाद हैरत में पड़ी ब्रिटिश सरकार ने मंगलवार को अपने निर्णय का बचाव किया। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने ब्रिटेन के इस फैसले का समर्थन किया था।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हैरानी की बात है कि हमारा ‘शानदार’ नाटो सहयोगी ब्रिटेन इस समय डिएगो गार्सिया द्वीप (जहां अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है) को मॉरीशस को सौंपने की योजना बना रहा है और वह भी बिना किसी वजह के।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन और रूस ने पूरी तरह कमजोरी भरे इस कदम पर ध्यान दिया होगा।’’

ट्रंप ने कहा, ‘‘ब्रिटेन द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण भूमि को सौंपा जाना घोर मूर्खता का कार्य है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के उन कई कारणों में से एक है जिनके चलते ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा आवश्यक है।’’ अमेरिकी राष्ट्रपति की यह तीखी प्रतिक्रिया ग्रीनलैंड को लेकर बढ़े तनाव को शांत करने और कमजोर पड़ चुके अटलांटिक पार संबंधों को सुधारने के ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के प्रयासों के लिए एक झटका है।

स्टार्मर ने सोमवार को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने संबंधी ट्रंप के बयानों को ‘‘पूरी तरह गलत’’ बताया, लेकिन साथ ही कहा कि इस मतभेद को ‘‘शांतिपूर्ण चर्चा के जरिये सुलझाया जाना चाहिए।’’

दो सदियों से ब्रिटेन के नियंत्रण में चागोस

ब्रिटेन और मॉरीशस ने मई में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसके तहत दो सदियों तक ब्रिटिश नियंत्रण में रहने के बाद चागोस द्वीपसमूह की संप्रभुता मॉरीशस को दी जाएगी। हालांकि, इस द्वीपसमूह के जिस डिएगो गार्सिया द्वीप पर अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थित है, उसे ब्रिटेन कम से कम 99 साल के लिए पट्टे पर वापस लेगा। अमेरिका सरकार ने पूर्व में समझौते का स्वागत करते हुए कहा था कि इससे ‘‘डिएगो गार्सिया में स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे का दीर्घकालिक, स्थिर और प्रभावी संचालन सुनिश्चित होगा।’’

ब्रिटेन के कैबिनेट मंत्री डैरेन जोन्स ने मंगलवार को कहा कि यह समझौता ‘‘अगले 100 वर्षों के लिए उस सैन्य अड्डे को सुरक्षित करेगा।’’ हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र और इसकी सर्वोच्च अदालत ने ब्रिटेन से द्वीपों को मॉरीशस को लौटाने को कहा है। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि ‘‘ब्रिटेन हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर कभी समझौता नहीं करेगा’’, और ‘‘यह समझौता डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे के संचालन को पीढ़ियों तक सुरक्षित करता है, जिसमें इसकी अनूठी क्षमताओं को बरकरार रखने और हमारे दुश्मनों को बाहर रखने के लिए मजबूत प्रावधान शामिल हैं।’’

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चागोस द्वीपसमूह में 2500 अमेरिकी सैनिक

इस समझौते का ब्रिटेन के विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि द्वीपों को छोड़ने से उन पर चीन और रूस के हस्तक्षेप का खतरा बढ़ सकता है।

अमेरिका के अनुसार, डिएगो गार्सिया सैन्य प्रतिष्ठान में लगभग 2,500 (ज्यादातर अमेरिकी सैनिक) तैनात हैं और यह मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया तथा पूर्वी अफ्रीका में सुरक्षा अभियानों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। चागोस द्वीपसमूह 1814 से ब्रिटिश नियंत्रण में हैं, जब फ्रांस ने इसे ब्रिटेन को सौंप दिया था।

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