

वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दुनिया भर में सभी अप्रवासी वीजा (इमिग्रेंट वीजा) आवेदनों पर रोक लगा दी है। यह कदम ऐसे लोगों की जांच के लिए उठाया गया है, जो जीवन-यापन के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर हो सकते हैं या जिन्हें ‘पब्लिक चार्ज’ की श्रेणी में रखा जा सकता है। ‘पब्लिक चार्ज’ उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जिसके बारे में अमेरिकी आव्रजन (इमिग्रेशन) अधिकारी मानते हैं कि वह मुख्य रूप से आर्थिक सहायता के लिए सरकार पर निर्भर हो सकता है।
नहीं बताया रोक कब तक जारी रहेगी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को ऐसे आवेदनों का ‘व्यापक और एक समान तरीके से’ आकलन करने का प्रशिक्षण दे रहा है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी वाणिज्य दूतावास अधिकारी हर वीजा आवेदक का व्यापक और एक समान तरीके से आकलन करने के लिए पूरी तरह सक्षम हों। विदेश विभाग ने हालांकि यह नहीं बताया कि प्रशिक्षण किस तरह का होगा और अपॉइंटमेंट में यह बदलाव कितने समय तक जारी रहेगा। यह उन आवेदकों पर सख्त पाबंदियां लगाकर उनकी पहुंच सीमित करने के लिए है, जिन पर योग्य अमेरिकियों के लिए निर्धारित ‘सरकारी लाभों’ पर निर्भर होने की आशंका हो सकती है।
वीजा आवेदकों को ईमेल भेजकर दी जा रही सूचना
अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में साक्षात्कार के लिए तारीख पा चुके अप्रवासी वीजा आवेदकों को ईमेल भेजकर बताया गया है कि उनकी वीजा आवेदन के साक्षात्कार की तारीख आगे बढ़ा दी गयी हैं और उन्हें बाद में नयी तारीख और समय की सूचना दी जायेगी। यह रोक अमेरिका द्वारा अवैध आव्रजन के खिलाफ कार्रवाई तेज किये जाने और ग्रीन कार्ड जारी करने के नियमों को सख्त किये जाने के बीच लगायी गयी है। यह फैसला ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा के लिए 1,03,265 अमेरिकी डॉलर के नये आवेदन शुल्क का प्रस्ताव दिये जाने के एक दिन बाद आया है।
इमिग्रेशन नीतियों को कोर्ट में भी चुनौती
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों को कानूनी मोर्चे पर भी झटका लगा है। अमेरिका के एक जज ने शुक्रवार को उस नीति को खारिज कर दिया, जिसके तहत 75 देशों के आवेदकों को इमिग्रेंट वीजा जारी करने पर रोक लगायी गयी थी। कोर्ट ने माना कि यह कदम विदेशमंत्री मार्को रुबियो को मिली वैधानिक शक्तियों से आगे था। प्रशासन ने कानूनी इमिग्रेशन पर भी प्रतिबंध और कड़े करने की दिशा में कदम उठाये हैं। इससे पहले ट्रंप की ओर से लगायी गयी 1 लाख डॉलर की फीस को कोर्ट ने रोक दिया था। प्रस्तावित फीस से विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने वाले नियोक्ताओं की लागत काफी बढ़ सकती है।
H-1B आवेदकों की जांच और कड़ी करने का भी आदेश
H-1B कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष प्रशिक्षण वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। इसके तहत हर साल 65,000 वीजा दिये जाते हैं, जबकि एडवांस्ड डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा का प्रावधान है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B आवेदकों की जांच और कड़ी करने का भी आदेश दिया है। साथ ही वीजा चयन प्रक्रिया में ऐसे बदलाव प्रस्तावित किये गये हैं, जिनसे ज्यादा कौशल और अधिक वेतन वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलेगी।