20 बागी सांसदों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है तृणमूल

कल्याण बनर्जी के बयान से कानूनी कार्रवाई के संकेत
सुप्रीम कोर्ट में कल्याण बनर्जी
सुप्रीम कोर्ट में कल्याण बनर्जी
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के खिलाफ पार्टी जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी के बयान से पार्टी की कानूनी रणनीति के संकेत मिले हैं।

बुधवार को कल्याण बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को सलाह दी है कि एनसीपीआई में शामिल हो चुके 20 बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाए। उनका कहना था कि दूसरे राजनीतिक दल का दामन थामने के बाद इन सांसदों पर संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधान लागू होते हैं और उनकी सदस्यता पर फैसला न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन इससे पार्टी कानूनी विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। कल्याण ने बताया कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी को संदेश भेजकर सुप्रीम कोर्ट जाने का सुझाव दिया है। अब अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और उसके वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ लेंगे।

बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए उन्होंने उन्हें "गद्दार" करार दिया। वहीं, 21 जुलाई के बाद भी बागी सांसदों और विधायकों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने के सवाल पर उन्होंने कहा, "अगले एक सप्ताह में कुछ बड़ा देखने को मिलेगा।"

पार्टी सूत्रों के अनुसार, यदि नेतृत्व मंजूरी देता है तो तृणमूल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एनसीपीआई की वैधता और 20 बागी सांसदों पर दल-बदल विरोधी कानून लागू करने की मांग कर सकती है।

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