तृणमूल ने CEC को हटाने का प्रस्ताव लाने पर संपर्क कियाः कांग्रेस

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया था।
तृणमूल ने CEC को हटाने का प्रस्ताव लाने पर संपर्क कियाः कांग्रेस
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नई दिल्लीः कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने के संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उससे संपर्क्र किया है और वह इस विषय पर सकारात्मक ढंग से विचार कर रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का आह्वान किया था और इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से समर्थन मांगा था।

बनर्जी अपने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान के तहत राष्ट्रीय राजधानी में हैं। इस बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘टीएमसी ने इस बारे में संपर्क किया है। मुझे लगता है कि पूरा विपक्ष इस पर फैसला करेगा। यह सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है, जिसे टीएमसी ने उठाया है। हम इस पर सकारात्मक रूप से विचार कर रहे हैं।’’

ममता और अभिषेक ने लिया फैसला

यह पहले ही बताया जा चुका है कि तृणमूल कांग्रेस देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग (इमपिचमेंट) प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार शाम संसद के दोनों सदनों के तृणमूल सांसदों के साथ हुई बैठक में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त एक संवैधानिक पद पर होते हैं, और उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर तृणमूल के पास वर्तमान में 41 सांसद हैं, ऐसे में पार्टी को समान विचारधारा वाले अन्य दलों का समर्थन जुटाना होगा। सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल भाजपा-विरोधी दलों से संपर्क करेगी। समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और डीएमके जैसे दलों से समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हाल ही में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल नेतृत्व के बीच हुई मुलाकात को भी अहम माना जा रहा है। तृणमूल का मानना है कि महाभियोग प्रस्ताव के जरिए वह संसद में भाजपा की भूमिका को उजागर कर सकेगी और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करेगी।

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