डिगलीपुर के किसानों को गाय और बकरी दूध मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण

डिगलीपुर के किसानों को गाय और बकरी दूध मूल्य संवर्धन का प्रशिक्षण
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के अंतर्गत पशु चिकित्सालय, डिगलीपुर ने कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) के सहयोग से 19 फरवरी को आरके ग्राम, डिगलीपुर निवासी अनिल डे के फार्म पर एक क्षेत्र स्तरीय प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डेयरी और बकरी पालन से जुड़े किसानों को दूध प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाने की जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करना था कार्यक्रम में किसानों को विशेष रूप से बकरी और गाय के दूध से बने उत्पादों के उच्च पोषण मूल्य के बारे में बताया गया। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों के लिए इन उत्पादों की बढ़ती मांग, मूल्य संवर्धन से फसलोपरांत हानि में कमी, ग्रामीण रोजगार सृजन और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण ग्रामीण डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने और आय स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास का हिस्सा है।

डिगलीपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। विशेष रूप से महिला किसानों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और उन्होंने मूल्य संवर्धित उत्पादों को अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की। इससे स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण समुदाय में डेयरी और बकरी पालन से जुड़े नवाचार और प्रशिक्षण की मांग बढ़ रही है।

कार्यक्रम के दौरान विभाग ने यह भी बताया कि इस प्रकार के क्षेत्र स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य ग्रामीण डेयरी क्षेत्र को और सशक्त बनाना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में सतत आजीविका को प्रोत्साहित करना है।

अनिल डे के फार्म पर आयोजित इस कार्यक्रम ने किसानों को यह समझने का अवसर प्रदान किया कि दूध मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण न केवल आय में वृद्धि कर सकते हैं, बल्कि ग्रामीण समुदाय की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान कर सकते हैं। विभाग के अधिकारी और प्रशिक्षक किसानों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देते हुए उन्हें मूल्य संवर्धित उत्पादों के उत्पादन और विपणन के व्यावहारिक तरीकों से परिचित कराए।

इस क्षेत्र स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण किसानों के लिए एक प्रेरक पहल के रूप में कार्य किया और स्थानीय डेयरी क्षेत्र में सतत विकास के लिए मार्ग प्रशस्त किया। कार्यक्रम में किसानों के बीच जागरूकता बढ़ी और आने वाले समय में इससे अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में डेयरी व्यवसाय और स्वरोजगार को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

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