अब पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

'अतिथि देवो भव:' की भावना से बंगाल बनेगा वैश्विक पर्यटन हब
पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष
पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार पर्यटन विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखते हुए राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी कर रही है।

गुरुवार को विधानसभा में पर्यटन विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष ने कहा कि सुंदरबन में ब्लू कार्बन इकोनॉमी और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए वन विभाग के साथ एक अंतर-विभागीय समिति गठित की जाएगी, ताकि पर्यटन गतिविधियों का पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

यात्रियों की सुविधा के लिए विभाग हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप भी शुरू करेगा। मंत्री ने बताया कि केंद्र की 'अतिथि देवो भव' की भावना से प्रेरित 'वन स्टेट : वन ग्लोबल डेस्टिनेशन' योजना के तहत पश्चिम बंगाल को दो वैश्विक पर्यटन स्थलों का लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने आशा जताई कि इनमें दार्जिलिंग के साथ सुंदरबन या मंदारमणि शामिल होंगे।

राज्य के 108 प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास भी पर्यटन संबंधी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 'रिवैम्प होमस्टे-2026' नीति के तहत दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, डुआर्स और झाड़ग्राम में होमस्टे को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही राज्य के होटलों को केंद्र के 'निधि' पोर्टल से जोड़ा जाएगा। सरकार 2026-27 में एमआईसीई प्रमोशन ब्यूरो की स्थापना कर 2,000 आयोजनों के माध्यम से लगभग 2,000 करोड़ रुपये के पर्यटन कारोबार का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके अलावा, चाय बागानों पर आधारित टी टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय परिवारों की आय बढ़ाने की भी योजना है।

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