स्टॉकहोम : जॉन क्लार्क, माइकल एच डेवोरेट और जॉन एम मार्टिनिस को क्वांटम मेकेनिक्स टनलिंग में उनके अनुसंधान के लिए भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा मंगलवार को की गयी। इन तीनों विज्ञानियों को यह पुरस्कार बिजली के सर्किट में बड़े पैमाने पर ‘क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा के स्तरों की खोज’ के लिए मिला है। तीनों को 10 दिसंबर को आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया जायेगा।
‘असंभव’ को ‘संभव’ किया
गौरतलब है कि आम जिंदगी में हम देखते हैं कि कोई गेंद दीवार से टकराकर वापस आ जाती है। लेकिन क्वांटम की दुनिया में छोटे कण कभी-कभी दीवार को पार कर दूसरी तरफ चले जाते हैं। इसे क्वांटम टनलिंग कहते हैं। अब विज्ञानियों ने इस टनलिंग को बिजली के सर्किट जैसे बड़े सिस्टम में देखा है, जो पहले असंभव माना जाता था। इसके साथ ही, उन्होंने ऊर्जा के निश्चित स्तरों (क्वांटीफिकेशन) को भी देखा, जो इस खोज को और खास बनाता है। इस खोज से भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और नयी तकनीकों को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
अब तक 226 विज्ञानियों को मिल चुके भौतिकी के नोबेल पुरस्कार
भौतिकी के क्षेत्र में 1901 से 2024 के बीच 118 बार यह सम्मान प्रदान किया जा चुका है। अब तक 226 विज्ञानियों को भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। स्टॉकहोम स्थित रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा इस वर्ष घोषित किया जाने वाला यह दूसरा पुरस्कार है। एक दिन पहले ही तीन विज्ञानियों को चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गयी। पिछले साल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अग्रदूत जॉन हॉपफील्ड और जेफ्री हिंटन को मशीन लर्निंग के आधार स्तंभ बनाने में मदद के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। मैरी ई ब्रुनको, फ्रेड रैमस्डेल और डॉ. शिमोन साकागुची को सोमवार को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों में 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर) की नकद राशि प्रदान की जाती है।