निधि, सन्मार्ग संवाददाता
नदिया : हांसखाली सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में मंगलवार को रानाघाट कोर्ट ने तीन मुख्य दोषियों ब्रज गयाली, रंजीत मल्लिक और प्रभाकर पोद्दार को 'आमरण कारावास' यानी आखरी सांस तक जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही साक्ष्य मिटाने और अपराध में सहयोग करने के जुर्म में मुख्य दोषी ब्रज के पिता और पूर्व तृणमूल नेता समरेंद्र गयाली को 5 साल जेल की सजा सुनायी। 3 साल आठ महीने और नौ दिनों के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले से पीड़िता की मां संतुष्ट नहीं हैं।
मां ने जतायी नाराजगी, कहा- फांसी होती तो मिलता न्याय
उन्होंने नम आंखों से कहा कि उनकी बेटी के साथ जो दरिंदगी हुई, उसके लिए दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी। फांसी होने पर ही उनके कलेजे को ठंडक मिलती। यह घटना 4 अप्रैल 2022 की है, जब 14 वर्षीय नाबालिग को जन्मदिन की पार्टी में बुलाकर उसे शराब पिलाई गई और उससे सामूहिक दुष्कर्म किया गया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण जब पीड़िता की मौत हो गई, तो अपराधियों ने कानूनी प्रक्रिया और मेडिकल सर्टिफिकेट के बिना ही रात के अंधेरे में शव का अंतिम संस्कार कर दिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जांच सीबीआई को सौंपी थी। सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस और जांच एजेंसी ने 28 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत कुल 6 लोगों को सजा सुनाई है, जबकि एक नाबालिग आरोपित पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर उसे निगरानी में रखने का निर्देश दिया गया है। सजा सुनाए जाने के बाद जहां पीड़िता के परिवार में न्याय की अधूरी आस को लेकर दुख है, वहीं दोषियों के वकीलों ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय जाने की बात कही है।