

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बैरकपुर : बैरकपुर नगर विद्यापीठ में पढ़ने वाले लगभग 60 छात्र-छात्राओं के भविष्य को लेकर अभिभावकों के बीच गहरी चिंता छा गई है। इसका कारण है कि स्कूल के सभी चारों शिक्षकों को एसआईआर (वोटर लिस्ट का विशेष गहन संशोधन) प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में नियुक्त कर दिया गया है, जिसके कारण स्कूल में पठन-पाठन पूरी तरह से बाधित होने की आशंका है।
जानकारी के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए पहले ही स्कूल के तीन शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी पर नियुक्त कर दिया था। ये शिक्षक पहले से ही चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं और इस वजह से नियमित रूप से स्कूल नहीं आ पा रहे थे।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सोमवार को स्कूल की एक और शिक्षिका, कृष्णा सरकार, को भी बीएलओ नियुक्त कर दिया गया। हालांकि, मंगलवार को स्कूल खुला देखकर शिक्षिका कृष्णा सरकार स्कूल पहुंचीं और अटेंडेंस (उपस्थिति) दर्ज की। लेकिन उन्होंने चिंतित अभिभावकों को सूचित किया कि उन्हें भी बीएलओ का काम पूरा करने के लिए जाना होगा और इसलिए वह भी संभवतः स्कूल नहीं आ पाएंगी।
इस प्रकार, स्कूल के सभी चारों शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी लग जाने के कारण बैरकपुर नगर विद्यापीठ में छात्रों की कक्षाएं पूरी तरह से रुक जाने का खतरा मंडरा रहा है। लगभग 60 छात्रों के अभिभावकों को डर सता रहा है कि यदि शिक्षक स्कूल नहीं आएंगे तो इसका सीधा और नकारात्मक असर उनके बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्कूल के छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने तुरंत स्थानीय पार्षद सपन बनर्जी को इस पूरे मामले की जानकारी दी।
मामले की गंभीरता को समझते हुए, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तत्काल कार्रवाई की। बैरकपुर नगर पालिका के चेयरमैन उत्तम दास और पार्षद सम्राट तपादार ने बैरकपुर के एसडीओ (सब-डिविजनल ऑफिसर) कार्यालय पहुंचकर एसडीओ सौरभ बारीक को इस संबंध में एक लिखित पत्र सौंपा।
जनप्रतिनिधियों ने पत्र में एसडीओ से इस मामले में हस्तक्षेप करने और तुरंत उचित कदम उठाने की मांग की है। पार्षद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि "एसआईआर की प्रक्रिया आवश्यक है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।" उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि चुनावी ड्यूटी के कारण स्कूल में शिक्षकों की अनुपस्थिति को देखते हुए, पठन-पाठन सुनिश्चित करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो।
यह घटना दर्शाती है कि आवश्यक प्रशासनिक कार्यों में शिक्षकों की व्यापक तैनाती से छात्रों की शिक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।