मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में पूरे राज्य में पूजा समितियां और मूर्तिकार जोर-शोर से पंडाल निर्माण और मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। इस बार कहीं उत्तर बंगाल की विलुप्त हो रही लोक परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है तो कहीं ‘आत्म-शुद्धि’ करने का दृश्य दर्शकों को देखने को मिलेगा।
मुदियाली क्लब में दिखेगी ''आत्म-शुद्धि'' की झलक
हर साल की तरह इस साल भी मुदियाली क्लब ने कुछ अलग करने की कोशिश की है। इस बार का थीम है ''आत्म-शुद्धि'', जो दर्शकों को आत्मचिंतन और आत्मबोध की ओर ले जाएगा। आत्म-शुद्धि का अर्थ है स्वयं को नये सिरे से पहचानना, मन के अंधकार को दूर कर सत्य, मधुरता और प्रकाश के मार्ग पर चलना। पूरे पंडाल का निर्माण टेराकोटा, ईंटों और मिट्टी जैसी पारंपरिक सामग्री से किया गया है। इस थीम के आर्टिस्ट विमान साहा हैं।
56 लाख रुपये के बजट से तैयार हो रहा है पंडाल
क्लब के सेक्रेटरी मनोज साहा व अरुण लाल ने बताया कि इस वर्ष क्लब की दुर्गा पूजा 91वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। उन्होंने बताया कि पंडाल का बजट 56 लाख रुपये है। मुदियाली क्लब की पूजा की खासियत यह है कि हर साल मां दुर्गा की प्रतिमा एक जैसी होती है, केवल मां का अलंकरण और पंडाल का थीम बदलता है। इस साल मां दुर्गा की प्रतिमा 9.5 फिट ऊंची है। थीम के अनुसार पंडाल में लाइटिंग का इस्तेमाल किया गया है।
कैसे पहुंचें इस पंडाल तक?
यदि आप मुदियाली क्लब जाना चहते हैं, तो सबसे पहले निकटतम मेट्रो स्टेशन रवींद्र सरोवर जाना होगा। यह पंडाल यहां से मात्र कुछ ही दूरी पर है जो एसआर दास रोड में पड़ता है।