चुनाव ड्यूटी में लगे वाहनों के किराये में भारी वृद्धि की मांग

परिवहन संचालकों ने खटखटाया चुनाव आयोग और सरकार का दरवाजा
There is a demand for a significant increase in the rental rates for vehicles used for election duty.
फाइल फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच परिवहन संचालकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर हुंकार भर दी है। चुनाव ड्यूटी और अन्य सरकारी कार्यों के लिए अधिग्रहित (Requisition) किए जाने वाले वाहनों के मौजूदा किराये को 'अपर्याप्त' और 'तर्कहीन' बताते हुए ज्वाइंट फोरम ऑफ ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स (JFTO) ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि समय रहते दरों में संशोधन नहीं किया गया, तो भविष्य में सरकारी सेवाओं के लिए वाहनों की आपूर्ति सुनिश्चित करना कठिन हो जाएगा।

महंगाई की मार और अपर्याप्त मुआवजा

JFTO की ओर से परिवहन सचिव और चुनाव आयोग को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में वाहनों के संचालन और रखरखाव की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। संगठन के अनुसार, टायर, लुब्रिकेंट, बीमा प्रीमियम, स्पेयर पार्ट्स और स्टाफ के वेतन में 20 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। ऐसी स्थिति में, पुरानी दरों पर वाहनों को चुनाव ड्यूटी में भेजना संचालकों के लिए 'आत्मघाती' कदम साबित हो रहा है। संचालकों का कहना है कि वर्तमान में प्रशासन द्वारा दिया जाने वाला मुआवजा 'ऊंट के मुंह में जीरा' के समान है, जिससे वाहन की किश्त और ड्राइवरों का खर्च निकालना भी दूभर है।

समान नीति और समान भत्ते की मांग

संगठन ने विशेष रूप से मांग की है कि संसद से लेकर पंचायत चुनाव तक 'समान किराया' और 'समान खोराकी' (भोजन भत्ता) की नीति लागू की जाए। JFTO ने चुनाव आयोग से इस संवेदनशील मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उनका तर्क है कि चुनाव के दौरान जिला प्रशासन और सुरक्षा बल पूरी तरह से निजी बसों और छोटे वाहनों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जब मुआवजे की बारी आती है, तो परिवहन संचालकों की उपेक्षा की जाती है।

प्रस्तावित नई दरें: एक नजर में

JFTO ने सरकार के समक्ष जो नई दरों का प्रस्ताव रखा है, उसमें किराए को लगभग दोगुना करने की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार:

  • बड़ी बसों के लिए (ईंधन खर्च को छोड़कर) वर्तमान में मिलने वाले 2,530 रुपये के किराए को बढ़ाकर 4,500 रुपये करने की मांग की गई है।

  • मिनी बस श्रेणी के लिए मौजूदा किराया 2,090 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 3,500 रुपये करने का प्रस्ताव है।

  • छोटे वाहन (7 सीटर), जिनका वर्तमान किराया मात्र 890 रुपये है, उनके लिए संचालकों ने 1,500 रुपये की मांग रखी है।

  • मैक्सी कैब (14-22 सीटर) के लिए वर्तमान में निर्धारित 1,310 रुपये की जगह 2,000 रुपये करने का सुझाव दिया गया है।

  • सबसे महत्वपूर्ण, फील्ड में तैनात स्टाफ का भोजन भत्ता (खोराकी), जो फिलहाल 250 रुपये है, उसे बढ़ाकर सीधा 500 रुपये करने पर जोर दिया गया है।

संचालकों ने चेतावनी दी है कि वे लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को भी उनके आर्थिक हितों की रक्षा करनी होगी। अब गेंद सरकार और चुनाव आयोग के पाले में है कि वे इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।

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