

कोलकाता : केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया की एक भाषाई चूक से एक अप्रत्याशित राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। तृणमूल सांसद सागरिका घोष ने फेसबुक पर वीडियो क्लिप साझा करते हुए इस घटनाक्रम को शर्मनाक करार दिया। पश्चिम बंगाल भाजपा ने इस विवाद को कम करने की कोशिश करते हुए इसे लीग स्तर के संकट को सुलझाने से संबंधित घोषणा करने के दौरान अनजाने में हुई एक गलती बताया। मांडविया मंगलवार को नयी दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाणिज्यिक साझेदार न मिलने के कारण स्थगित हुई इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की 14 फरवरी से पुनः शुरुआत की घोषणा कर रहे थे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ‘मोहन बागान’ और ‘ईस्ट बंगाल’ नामों के उच्चारण में लड़खड़ा गई, जिसके कारण विवाद खड़ा हो गया, क्योंकि ये दोनों संस्थाएं न केवल शहर की खेल भावना को परिभाषित करती हैं, बल्कि इसकी सांस्कृतिक संरचना का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वे रुके, मदद मांगी, खुद को सुधारा और आगे बढ़े...
कैमरा चालू रहने के दौरान मंत्री का उच्चारण कुछ क्षण के लिए लड़खड़ा गया। वे रुके, मदद मांगी, खुद को सुधारा और आगे बढ़े। लेकिन सोशल मीडिया पर यह चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मंत्री कहते दिख रहे हैं, ‘मोहन बेगन....ईस्ट बेगन।’ लेकिन इसके तुरंत बाद खुद के उच्चारण में सुधार करते हुए मंत्री ने कहा, ‘‘ईस्ट बंगाल।’’ उच्चारण में गड़बड़ी, जो ध्वन्यात्मक रूप से शब्द ‘बैगन’ (एक सब्जी) से मिलती-जुलती थी, बंगाल में तीखी राजनीतिक आलोचना को जन्म दिया।
तृणमूल ने केंद्र सरकार पर सांस्कृतिक रूप से असंवेदनशील होने का आरोप लगाया
तृणमूल ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर सांस्कृतिक रूप से असंवेदनशील होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 1889 (मोहन बागान) और 1920 (ईस्ट बंगाल) में स्थापित क्लबों के नाम में गड़बड़ी कोई मामूली चूक नहीं थी, बल्कि यह राज्य से व्यापक अलगाव का प्रतीक थी। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस घटनाक्रम ने उन संस्थानों से अनभिज्ञता उजागर की है, जिन्होंने राष्ट्रीय लीगों और टेलीविजन समझौतों से बहुत पहले भारतीय फुटबॉल को आकार दिया था। उन्होंने कहा कि 1911 में नंगे पैर खेलने वाले मोहन बागान के फुटबॉलरों की ब्रिटिश रेजिमेंट पर जीत आज भी राष्ट्रवादी लोककथाओं में अपना स्थान रखती है, जबकि ईस्ट बंगाल का उदय लंबे समय से प्रवासन, संघर्ष और दृढ़ता से जुड़ा रहा है। मोहन बागान क्लब के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने कहा, ‘ये दोनों सौ साल पुराने क्लब हैं। मोहन बागान एक राष्ट्रीय क्लब है और ईस्ट बंगाल जुझारू भावना का प्रतीक है। केंद्रीय खेल मंत्री मोहन बागान और ईस्ट बंगाल के नाम पढ़ने के बावजूद उनका सही उच्चारण नहीं कर पाते।’