बैरकपुर के आनंदपुरी मैदान में बुक फेयर के आयोजन की स्वीकृति दिये जाने की तृणमूल में रखी मांग

SIR प्रक्रिया को लेकर भी सांसद ने भाजपा सरकार को घेरा
The Trinamool Congress has demanded that permission be granted for organizing a book fair at Anandapuri Maidan in Barrackpore.
टीटागढ़ में संवाददाता सम्मेलन करते दमदम-बैरकपुर जिला तृणमूल संगठन अध्यक्ष पार्थ भौमिक। साथ हैं पूर्व चेयरमैन प्रशांत चौधरी, दमदम-बैरकपुर जिला तृणमूल हिंदी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमित गुप्ता, दमदम-बैरकपुर जिला माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष नौशाद आलम व अन्य
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बैरकपुर: उत्तर 24 परगना का औद्योगिक अंचल बैरकपुर अब एक नए विवाद का केंद्र बन गया है। इस बार विवाद का विषय कोई राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि ज्ञान का प्रतीक 'पुस्तक मेला' है। बैरकपुर के ऐतिहासिक आनंदपुरी मैदान में बुक फेयर के आयोजन की अनुमति न मिलने पर सियासत गरमा गई है। दमदम-बैरकपुर जिला तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष और सांसद पार्थ भौमिक ने उक्त मैदान में बुक फेयर व अन्य सामा​जिक कार्यक्रमों के आयोजन की स्वीकृति दिये जाने की कैंटोनमेंट बोर्ड से मांग की है।

संस्कृति पर प्रहार: नाटककार चंदन सेन की गुहार

विख्यात नाटककार और सांस्कृतिक व्यक्तित्व चंदन सेन ने आनंदपुरी मैदान में एक पुस्तक मेले के आयोजन के लिए आवेदन किया था। बंगाल की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए इस आवेदन को कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से अब तक हरी झंडी नहीं मिली है। चंदन सेन का कहना है कि पहले भी उन्होंने यहां बुक फेयर का आयोजन किया था। बैरकपुर ​अंचल में भारी संख्या में लोग यहां पहुंचे थे अतः वे चाहते हैं कि मैदान में अगर राजनीतिक सभा के लिए स्वीकृति दी गयी है तो उन्हें भी इस आयोजन को लेकर स्वीकृति मिलेगी।

पार्थ भौमिक का प्रहार: 'अमित शाह की सभा को अनुमति तो मेले को क्यों नहीं?'

इस मुद्दे पर गरजते हुए सांसद पार्थ भौमिक ने भाजपा सरकार और बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

"अगर इसी आनंदपुरी मैदान में देश के गृहमंत्री अमित शाह की राजनीतिक सभा के लिए अनुमति दी जा सकती है, तो फिर जनहित से जुड़े पुस्तक मेले या खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए पाबंदी क्यों? यह भाजपा की दमनकारी नीति और बंगाल की संस्कृति के प्रति उनकी उपेक्षा को दर्शाता है।"

सांसद ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही पुस्तक मेले को अनुमति नहीं मिली, तो तृणमूल कांग्रेस बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।

SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल: 'बंगाल पर जबरन लादा जा रहा फैसला'

पुस्तक मेले के साथ-साथ पार्थ भौमिक ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरे में लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में और बिना पर्याप्त समय दिए बंगाल पर थोपी जा रही है। उन्होंने मांग की कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद केंद्र को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बंगाल में कितने लोग 'बाहरी' हैं।

भौमिक ने कहा कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के इस कदम के पीछे गहरी राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति को समझे बिना इस तरह की जटिल प्रक्रियाओं को लागू किया गया है।

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