दिवंगत विधायक के बेटे को SIR सुनवाई की नोटिस

The son of the deceased MLA has received a hearing notice from SIR.
सांकेतिक फोटो REP
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सन्मार्ग संवाददाता

नदिया : पश्चिम बंगाल में एसआईआर (Special Inquiry Report) को लेकर चल रही खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में चिंता की लहर दौड़ गई है। हाल के दिनों में सत्ताधारी दल (TMC) के कई नेताओं को एक के बाद एक नोटिस भेजे गए हैं और उन्हें सुनवाई के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इसी कड़ी में अब तेहट्ट के दिवंगत विधायक तापस कुमार साहा के बेटे साग्निक साहा का नाम भी जुड़ गया है, जिसे लेकर हर तरफ हैरानी जताई जा रही है।

इंजीनियर बेटे को नागरिकता साबित करने का फरमान

दिवंगत विधायक तापस साहा के पुत्र साग्निक साहा प्रत्यक्ष राजनीति से कोसों दूर हैं। वह बेंगलुरु में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं और एक पेशेवर जीवन जी रहे हैं। पिता की मृत्यु के बाद, वह वर्तमान में तेहट्ट थाना क्षेत्र के कड़ुईगाछी स्थित अपने पैतृक निवास पर रह रहे हैं। बुधवार दोपहर जब चुनाव आयोग ने उन्हें SIR सुनवाई का नोटिस भेजा, तो वह स्तब्ध रह गए। नोटिस में उनसे उनकी भारतीय नागरिकता के प्रमाण मांगे गए हैं।

साग्निक साहा की नाराजगी और दुख

इस नोटिस को पाकर साग्निक ने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि जिस राज्य और जिले की जनता ने उनके पिता को दो बार चुनकर विधानसभा भेजा, आज उसी तंत्र द्वारा उनकी नागरिकता पर सवाल उठाना अपमानजनक है। साग्निक ने मीडिया से बात करते हुए कहा:

"मेरे पिता लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे। वह राज्य का एक जाना-माना चेहरा थे। उन्होंने एक ही जिले की दो अलग-अलग विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व किया। अब मुझे यह साबित करना होगा कि मैं भारतीय नागरिक हूँ या नहीं? यह किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं है।"

तापस कुमार साहा: एक प्रभावशाली राजनीतिक सफर

साग्निक के पिता तापस कुमार साहा तृणमूल कांग्रेस के एक कद्दावर नेता थे। उनके राजनीतिक सफर की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • 2016 विधानसभा चुनाव: वह पहली बार पलाशिपारा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।

  • 2021 विधानसभा चुनाव: उन्होंने तेहट्ट विधानसभा से चुनाव लड़ा और कड़े मुकाबले के बीच शानदार जीत दर्ज की।

  • निधन: साल 2025 की शुरुआत में वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे। लंबी बीमारी के बाद 15 मई की सुबह कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उनका देहांत हो गया।

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