निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बनगाँव (उत्तर 24 परगना): बनगाँव के ढाका पाड़ा इलाके में एक परित्यक्त (छोड़े हुए) बैग में इंसानी खोपड़ी और हड्डियाँ मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में जो दहशत और सनसनी फैल गई थी, उसका रहस्य अब सुलझ गया है। पुलिस और स्थानीय लोगों की आशंका के विपरीत, यह घटना किसी हत्या या जघन्य अपराध से संबंधित नहीं थी, बल्कि कोलकाता के एक मेडिकल छात्र की लापरवाही और सामान खोने का परिणाम थी।
दरअसल, यह बैग कोलकाता के प्रतिष्ठित नीलरतन सरकार (NRS) मेडिकल कॉलेज के छात्र शाश्वत कुमार घोष का था। शाश्वत ने बताया कि यह बैग 3 नवंबर को ट्रेन से यात्रा के दौरान गुम हो गया था।
जब ढाका पाड़ा इलाके में यह संदिग्ध बैग मिला और स्थानीय लोगों ने इसमें मानव खोपड़ी और हड्डियाँ देखीं, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बैग को जब्त कर लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच शुरू कर दी।
मीडिया में इस "कंकाल कांड" की खबर और बैग की तस्वीरें प्रकाशित होने के बाद, छात्र शाश्वत कुमार घोष ने पुलिस से संपर्क किया। शाश्वत ने थाने में दावा किया कि वह खोपड़ी और हड्डियाँ उनकी थीं और उनका उपयोग शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा था। शाश्वत ने पुष्टि की कि ये अवशेष उनके फर्स्ट ईयर के प्रैक्टिकल (व्यावहारिक अध्ययन) का हिस्सा थे।
शाश्वत ने बताया कि वह ट्रेन से यात्रा कर रहे थे और उनका ध्यान भटकने के कारण बैग ट्रेन में ही छूट गया था। उन्होंने पहले रेलवे पुलिस (RPF) को भी इसकी सूचना दी थी, लेकिन बैग नहीं मिल पाया था। आज मीडिया के माध्यम से खबर मिलने पर उन्हें पता चला कि उनका खोया हुआ सामान मिल गया है।
पुलिस ने आवश्यक प्रमाण, जैसे कि छात्र पहचान पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज, की जाँच के बाद छात्र शाश्वत कुमार घोष को उनका बैग सौंप दिया।
इस अप्रत्याशित और विचित्र खुलासे के बाद, हत्या या किसी बड़े अपराध की आशंका से डरे हुए इलाके के लोगों ने राहत की साँस ली। इस पूरी घटना ने एक बार फिर मेडिकल छात्रों द्वारा मानव अवशेषों के रखरखाव और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया है।