सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय

पत्रकारिता की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी ताकत
कार्यक्रम की एक तस्वीर
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भोपाल : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद आलोक शर्मा ने सोमवार को कहा कि सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के लिए नए और व्यापक मंच उपलब्ध कराए हैं, लेकिन वहां अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का बढ़ता इस्तेमाल समाज के लिए चिंता का विषय है।

आलोक शर्मा ने भोपाल प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदी पत्रकारिता’ विषयक संगोष्ठी और पत्रकार सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की संस्कृति और संवेदनशीलता का प्रतिबिंब भी है।

भोपाल से लोकसभा सदस्य शर्मा ने कहा, ‘ऐसे समय में पत्रकारिता का दायित्व और बढ़ जाता है कि वह तथ्यों, भाषा की गरिमा और सामाजिक सरोकारों को मजबूती से सामने रखे।’ शर्मा की यह टिप्पणी सोशल मीडिया और देश के विभिन्न हिस्सों में आंदोलनों के दौरान ‘जेन जी’ के प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल की पृष्ठभूमि में आई है।

सांसद ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने पत्रकारिता के स्वरूप और उसकी पहुंच में व्यापक बदलाव किया है। अब समाचार कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है ऐसे में समाचार की गति के साथ उसकी विश्वसनीयता, तथ्यात्मकता और भाषा की गरिमा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। शर्मा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने हमेशा समाज को दिशा देने और जनसरोकारों को आवाज देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय में भी उसकी विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।

वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने कहा कि नयी प्रौद्योगिकी के साथ पत्रकारिता का स्वरूप बदल रहा है और नए अवसर सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के मूल सरोकारों को बनाए रखते हुए इन बदलावों को समझना महत्वपूर्ण है। वरिष्ठ पत्रकार अजय बोकिल और गिरिश उपाध्याय समारोह में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे। बोकिल ने कहा कि सोशल मीडिया ने समाचारों के प्रसार को तेज कर दिया है, लेकिन इसके साथ पत्रकारिता के सामने नयी चुनौतियां भी आई हैं। मीडिया जगत को पेशेवर दक्षता और सामूहिक प्रयासों के जरिये इन चुनौतियों का सामना करना होगा। उपाध्याय ने कहा कि पत्रकारिता के सामने हमेशा चुनौतियां रही हैं, लेकिन कृत्रिम मेधा (एआई) के दौर में इसका स्वरूप बदल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के बीच तथ्य, भाषा, विश्लेषण और पाठकों का विश्वास पत्रकारिता के वास्तविक आधार बने रहेंगे। क्लब के संरक्षक सतीश सक्सेना ने बताया कि भोपाल प्रेस क्लब की स्थापना के बाद से अब तक पत्रकारिता के प्रति समर्पण के लिए करीब 400 पत्रकारों को सम्मानित किया जा चुका है।

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