

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: मशहूर कवयित्री इंद्राणी दत्त पन्ना हमेशा से ही मूक पशुओं की आवाज बनती रही हैं। बचपन से ही पशु-पक्षियों के प्रति विशेष लगाव रखने वाली इंद्राणी का कुत्तों के प्रति प्रेम जगजाहिर है। इसी प्रेम और उनके प्रति होने वाली क्रूरता से विचलित होकर उन्होंने एक कविता संग्रह लिखा है, जिसका नाम है 'डूबते-डूबते' (Dubte Dubte)। यह किताब आगामी 22 जनवरी से शुरू हो रहे कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में रिलीज होने वाली है। इंद्राणी ने केवल कविताएं ही नहीं लिखीं, बल्कि उनके पुनर्वास और भोजन के लिए एक ठोस कदम भी उठाया है। उन्होंने घोषणा की है कि इस पुस्तक की बिक्री से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सड़क पर रहने वाले कुत्तों (Street Dogs) की भलाई और सेवा पर खर्च किया जाएगा। उनका संदेश स्पष्ट है, 'यह पृथ्वी उनकी भी उतनी ही है जितनी हमारी। हमें उनके बारे में भी सोचना चाहिए।'
मूक प्रेमियों को समर्पित नौवीं पुस्तक
अपनी इस नौवीं पुस्तक के बारे में इंद्राणी ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने लिखा कि हर बार नयी किताब आने पर मन में डर और उत्साह दोनों होता है कि पाठक इसे पसंद करेंगे या नहीं। उन्होंने इस पुस्तक को उन 'स्ट्रीट डॉग्स' को समर्पित किया है, जिन्हें वह अपना 'मूक शिक्षक' मानती हैं। इंद्राणी ने सड़क पर रहने वाले इन बेसहारा जानवरों की स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा है 'सर्दियों की रातों या मानसून की बारिश में जब मैं घर लौटती हूं, तो अक्सर मेरी आंखों में आंसू होते हैं। खुले आसमान के नीचे ठंड से कांपते या भूखे पेट दुबके हुए इन बेजुबानों को देखकर मन विचलित हो जाता है। ये नि:स्वार्थ प्रहरी हमारे अनमोल पड़ोसी हैं, जो थोड़े से प्यार के बदले ढेर सारा वफादार प्यार देते हैं।' इंद्राणी का मानना है कि आजकल कुत्तों के प्रति इंसानों की असहिष्णुता बढ़ती जा रही है। आए दिन उन पर होने वाले अत्याचार और उनके खिलाफ जारी होने वाले 'फतवों' की उन्होंने कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि इतनी क्रूरता सहने के बाद भी इंसान के प्रति इन जीवों का विश्वास और वफादारी कभी कम नहीं होती।