राजनीतिक हथियार बन कर रह गया है पीआईएल

ममता के मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी
राजनीतिक हथियार बन कर रह गया है पीआईएल
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : आजकल पीआईएल एक राजनीतिक हथियार बनकर रह गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दायर पीआईएल की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती ने यह टिप्पणी की। इसके साथ ही पीआईएल के पक्ष में बहस कर रहे एडवोकेट की जमकर क्लास भी ली। उनके साथ जस्टिस अतरूप बनर्जी भी थे।

जस्टिस चक्रवर्ती ने पिटीशन के एक शब्द की भूल स्पेलिंग का हवाला देते हुए पूछा कि क्या ऐसे ही पिटीशन ड्राफ्ट किया जाता है। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे एडिशनल एडवोकेट जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस स्थान पर यह टिप्पणी की थी वहां पेटीशनर मौजूद नहीं था। इसके अलावा इससे कोई संज्ञेय अपराध भी नहीं बनता है। ममता बनर्जी ने उस्मान होदा को लेकर एक टिप्पणी की थी। पिटीशन में कहा गया है कि इससे ऑफिशल सेक्रेट्स वायलेशन का मामला बनता है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने कहा कि इससे कोई संज्ञेय अपराध का मामला नहीं बनता है। ममता बनर्जी की तरफ से बहस कर रहे सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने इस पिटीशन की ग्रहणयोग्यता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के मुताबिक ममता बनर्जी के इस बयान के बाद बांग्लादेश में भयानक हंगामा हुआ था। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह एडवोकेट बांग्लादेश के लिए मामला कर रहे हैं। डिवीजन बेंच ने कहा है कि वह 14 सितंबर के इस मामले में आदेश देगा।

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