‘दीपथून’ पर दीप जलाने की अनुमति का आदेश बरकरार, हाईकोर्ट ने स्टालिन सरकार के राजनीति मंशा पर फेरा पानी

अदालत ने यह भी कहा, "न तो देवस्थानम (प्रबंधन) और न ही सरकार का यह कहना है कि तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर दीप जलाना प्रचलित नहीं है।"
‘दीपथून’ पर दीप जलाने की अनुमति का आदेश  बरकरार, हाईकोर्ट ने स्टालिन सरकार के राजनीति मंशा पर फेरा पानी
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मदुरैः मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी के ‘‘दीपथून’’ पर दीप जलाने की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को मंगलवार को बरकरार रखा। अदालत ने द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह दावा कि दीप जलाने से सार्वजनिक शांति में विघ्न उत्पन्न होगा, "बेहद हास्यास्पद" है।

न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के के रामकृष्णन की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर पत्थर का स्तंभ (दीपथून) स्थित है, वह भगवान सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर का है। न्यायालय ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि शैव मत के आगम शास्त्र में ऐसा कोई स्पष्ट एवं अनिवार्य नियम है जिसके अनुसार गर्भगृह में देवता के ठीक ऊपर सीध में न होने वाले स्थान पर दीपक जलाना वर्जित है। अदालत ने यह भी कहा, "...न तो देवस्थानम (प्रबंधन) और न ही सरकार का यह कहना है कि तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी पर दीप जलाना प्रचलित नहीं है।"

हाईकोर्ट ने सरकार के इरादे पर उठाया सवाल

उन्होंने कहा, "यह हास्यास्पद है और इस पर विश्वास करना मुश्किल है कि राज्य की ताकतवर सरकार को डर है कि देवस्थानम के प्रतिनिधियों को पहाड़ी की चोटी के पास स्थित पत्थर के स्तंभ पर दीप जलाने की अनुमति देने से सार्वजनिक शांति में विघ्न उत्पन्न होगा। ऐसा तभी हो सकता है जब राज्य स्वयं इस तरह का विघ्न उत्पन्न करने का समर्थन करे। हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी राज्य अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए इस स्तर तक नीचे नहीं जाएगा।"

तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करने का संकेत दिया है। तमिलनाडु के प्राकृतिक संसाधन मंत्री एस रेगुपति ने फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार को उच्चतम न्यायालय में अपील करने का अधिकार है। पूर्व कानून मंत्री ने पूछा, ‘‘यह साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं दिया गया कि दीपथून पर दीपम् प्रज्ज्वलित किया गया था....नयी परंपरा क्यों शुरू की जाए।’’

कार्तिगई दीपम् उत्सव पर दीपाथून में दीप प्रज्ज्वलन

अदालत के आदेश में कहा गया कि देवस्थानम् (मंदिर प्रबंधन) को दीपथून पर दीप प्रज्ज्वलित करना होगा। अदालत ने कहा, ‘‘एएसआई प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम एवं नियमों में निहित निषेधों और प्रतिबंधों के अतिरिक्त पहाड़ी क्षेत्र में स्थित स्मारकों के संरक्षण के लिए उपयुक्त और आवश्यक शर्तें लागू करेगा।’’

अदालत ने कहा कि देवस्थानम् को अपनी टीम के माध्यम से तमिल माह कार्तिगई (नवंबर-दिसंबर) में पड़ने वाले कार्तिगई दीपम् उत्सव पर दीपाथून में दीप प्रज्ज्वलित करना होगा। उसने कहा कि देवस्थानम् की टीम के साथ किसी भी आम व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं होगी और इस टीम के सदस्यों की संख्या एएसआई और पुलिस से परामर्श कर तय की जाएगी। जिलाधिकारी इस आयोजन का समन्वय और पर्यवेक्षण करेंगे।

भाजपा ने किया फैसले का स्वागत

याचिकाकर्ता रमा रविकुमार ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे भगवान मुरुगन के भक्तों की जीत बताया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह द्रविड़ मुनेत्र कषगम की सरकार के मुंह पर तमाचा है।

पिछले महीने, न्यायमूर्ति जी आर स्वामिनाथन ने याचिकाकर्ता रमा रविकुमार को दीपथून पर कार्तिगई दीपम् जलाने की अनुमति दी थी। सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ अपील की, जिसमें मंगलवार को खंडपीठ ने अपना निर्णय सुनाया।

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