

नयी दिल्ली : रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए 8 नये युद्धपोत बनाने के लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के समझौते पर साइन किये हैं। ये नेक्स्ट जनरेशन (नयी पीढ़ी) कॉर्वेट के युद्धपोत होंगे। इनमें आधुनिक मिसाइल, हथियार और सेंसर सिस्टम लगाये जायेंगे। इन युद्धपोतों को बनाने की जिम्मेदारी दो भारतीय कंपनियों को दी गयी है।
इनमें कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) पांच और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) तीन युद्धपोत बनायेगी। सोमवार को नयी दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किये गये।
दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों पर नजर रखेंगे
नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट में आधुनिक मिसाइल, हथियार और सेंसर सिस्टम लगाये जायेंगे। इनकी मदद से नौसेना हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे से आने वाले खतरों का मुकाबला कर सकेगी। इन जहाजों का इस्तेमाल समुद्री व्यापार के रास्तों की सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों के खिलाफ कार्रवाई और तटीय सुरक्षा के लिए किया जायेगा। ये समुद्र के किनारे सैन्य अभियान चलाने और निगरानी रखने में भी मदद करेंगे।
देश में बने सामान और तकनीक का इस्तेमाल
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन युद्धपोतों में 70 फीसदी से ज्यादा सामान भारत में बनाया जायेगा। इनका डिजाइन भी भारतीय नौसेना तैयार करेगी। युद्धपोतों को 2030 तक नौसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रोजेक्ट सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का हिस्सा है। इससे देश में युद्धपोत बनाने के काम को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने और भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
10 साल में 532 लाख काम के दिनों के बराबर रोजगार
इन युद्धपोतों के निर्माण से अगले 10 साल में शिपयार्ड में 72 लाख और उनसे जुड़े उद्योगों में 460 लाख काम के दिनों के बराबर रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। यानी अलग-अलग लोगों को मिलाकर कुल 532 लाख दिनों तक काम मिलेगा। इस परियोजना में सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ निजी शिपयार्ड और भारतीय उद्योग भी शामिल होंगे। इससे छोटे और मध्यम कारोबारों को भी काम के अवसर मिलेंगे।