सांसद ने पीएम से की सांसद निधि में वृद्धि की अपील

द्वीपों के विकास के लिए अतिरिक्त एमपीएलएडी सीमा की अपील
सांसद ने पीएम से की सांसद निधि में वृद्धि की अपील
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एमपीएलएडी में वृद्धि करने तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लिए विशेष अतिरिक्त सीमा प्रदान करने की अपील की है, ताकि द्वीपों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और विकास संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखा जा सके। अपने पत्र में सांसद ने उल्लेख किया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारतीय मुख्यभूमि से 1,200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है तथा यह भौगोलिक रूप से बिखरे और दूरस्थ द्वीपों का समूह है। मुख्यभूमि के विपरीत यहां लगभग सभी निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, स्टील, रेत, पत्थर, बिटुमेन, मशीनरी तथा कुशल और अकुशल श्रमिकों को भी समुद्री मार्ग से लाना पड़ता है, जिससे परिवहन, भंडारण और हैंडलिंग की लागत अत्यधिक बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप द्वीपों में निर्माण कार्यों की लागत मुख्यभूमि की तुलना में काफी अधिक हो जाती है। सांसद ने बताया कि डीएसआर-2021 के अनुसार अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में सिविल एवं आधारभूत ढांचा संबंधी कार्यों की लागत मुख्यभूमि की समान परियोजनाओं की तुलना में लगभग 50 से 70 प्रतिशत अधिक है, जहां सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है और परिवहन व्यय न्यूनतम होता है। द्वीपों में प्रत्येक सामग्री को लंबी दूरी से समुद्री मार्ग द्वारा लाना पड़ता है, जिससे छोटी परियोजनाएं भी आर्थिक रूप से भारी पड़ती हैं। बिष्णु पद रे ने आगे कहा कि उच्च लागत संरचना के कारण द्वीपवासियों की वास्तविक विकासात्मक आवश्यकताएं जैसे कच्ची सड़कों को पक्की सड़कों में परिवर्तित करना, पुलिया, नालियां एवं भूस्खलन रोकने हेतु रिटेनिंग वॉल का निर्माण, सामुदायिक भवन, खेल सुविधाएं और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास तथा दूरस्थ द्वीपों में नए वीकेवी विद्यालयों सहित शैक्षणिक एवं सामाजिक आधारभूत संरचना का विस्तार वर्तमान पांच करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की एमपीएलएडी सीमा में समुचित रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंडमान एवं निकोबार संसदीय क्षेत्र तीन जिलों में फैला हुआ है और इसका भौगोलिक क्षेत्रफल 8,249 वर्ग किलोमीटर है, जिससे चुनौती और बढ़ जाती है।

सांसद ने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 1993 में आरंभ की गई एमपीएलएडी योजना प्रारंभ में पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष थी, जिसे क्रमशः 1994-95 में एक करोड़, 1998-99 में दो करोड़ और 2011-12 में पाँच करोड़ रुपये किया गया, किंतु पिछले 14 वर्षों से इसमें कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि देशभर में सामग्री, श्रम और परिवहन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिसका प्रभाव अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में और अधिक महसूस किया जाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि द्वीपों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध पूंजीगत निधि सीमित है, जिसके कारण वित्तीय संसाधनों की कमी से अनेक कार्य लंबित पड़े हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बिष्णु पद रे ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वर्तमान एमपीएलएडी सीमा की समीक्षा कर उसमें वृद्धि की जाए तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह को विशेष मामले के रूप में अन्य क्षेत्रों की समान सीमा से अतिरिक्त आवंटन प्रदान किया जाए। सांसद ने आशा व्यक्त की कि सरकार इस लंबे समय से लंबित और वास्तविक मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी ताकि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का संतुलित, समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित हो सके।

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