

कोच्चि : फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2-गोज बियॉन्ड’ के प्रदर्शन का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने शुक्रवार को कहा कि इसके (फिल्म के) दिन में बुक किए गए टिकट का पैसा लोगों को लौटाया जा रहा है और फिल्म रिलीज नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं में से एक श्रीदेव नंबूदरी का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील मैत्रेयी सच्चिदानंद हेगड़े ने दोपहर में ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वह फिल्म के निर्माता के खिलाफ अवमानना याचिका दायर नहीं करेंगी क्योंकि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है और टिकट की बिक्री से मिली राशि लोगों को वापस की जा रही है।
हेगड़े ने सुबह न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस को बताया था कि फिल्म की रिलीज पर रोक के बावजूद टिकट की बुकिंग जारी थी। उन्होंने एकल न्यायाधीश के समक्ष इसका जिक्र तब किया जब फिल्म की रिलीज का मामला एक खंडपीठ के समक्ष था। खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को देर रात की सुनवाई के बाद इस संबंध में फैसला सुरक्षित रख लिया था। उन्होंने न्यायमूर्ति थॉमस को यह भी बताया कि वह इस बात की पुष्टि करेंगी कि क्या फिल्म दिन के दौरान सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जा रही थी और इसके बाद ही वह अवमानना की याचिका दायर करेंगी। हेगड़े ने दोपहर में न्यायाधीश के समक्ष कहा कि सत्यापन करने पर उन्हें पता चला कि ‘‘फिल्म रिलीज नहीं हुई है और टिकटों की राशि लोगों को वापस की जा रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, मैं अवमानना की याचिका दायर नहीं करूंगी।’’ न्यायमूर्ति थॉमस ने बृहस्पतिवार को यह कहते हुए फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों के लिए रोक लगा दी कि प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने निर्धारित दिशानिर्देशों पर ध्यान नहीं दिया और कानून की स्पष्ट रूप से अवहेलना हुई है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि ‘‘फिल्म में सांप्रदायिक वैमनस्य उत्पन्न करने या किसी समुदाय की बदनामी की संभावना प्रथम दृष्टया निहित प्रतीत होती है’’ इसलिए उच्च अधिकारियों द्वारा जांच किए बिना इसे रिलीज करना कानूनी रूप से अनुचित होगा। अदालत ने कहा था कि फिल्म के 'टीजर' की सामग्री में ‘‘प्रथम दृष्टया लोगों की धारणा को विकृत करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने की क्षमता प्रतीत होती है।’’
बाद में रात में निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति पी वी बालकृष्णन की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की, जिसने सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया। हालांकि, पीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए कोई अंतरिम निर्देश जारी नहीं किया।