निधि, सन्मार्ग संवाददाता
हालीशहर : बैरकपुर शिल्पांचल के हालीशहर में एक दिलचस्प और विवादास्पद मामला सामने आया है। यहाँ चुनाव आयोग ने रविवार को एक विशेष सुनवाई केंद्र केवल एक मतदाता के लिए दिन भर खुला रखा। हालाँकि, इस कदम ने राज्य की राजनीति में नया विवाद छेड़ दिया है। मिली जानकारी के अनुसार कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार रविवार को हालीशहर के रामप्रसाद विद्यापीठ स्कूल में एक विशेष सुनवाई केंद्र खोला गया। पूरे दिन में यहां केवल एक ही व्यक्ति सुनवाई के लिए पहुंचा, जो हालीशहर नगर पालिका के वार्ड नंबर 15 के निवासी सुदीप्त दास थे। उनकी सुनवाई के बाद यह केंद्र बंद कर दिया गया। सुदीप्त दास ने इस विशेष व्यवस्था के पीछे की कानूनी मजबूरी स्पष्ट की।
कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग ने की व्यवस्था
उन्होंने बताया कि वह पहले कांचरापाड़ा के मतदाता थे, लेकिन हालीशहर में बसने के बाद उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था। नए आवेदन के बाद उन्हें सुनवाई के लिए कांचरापाड़ा बुलाया गया, लेकिन कोर्ट के ही एक पुराने आदेश के कारण उनका उस क्षेत्र (बीजपुर थाना क्षेत्र) में प्रवेश वर्जित है। इस तकनीकी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद अदालत ने उनके लिए इस विशेष सुनवाई का प्रबंध करने का निर्देश दिया।
विपक्ष ने इसे बताया 'विशेष सुविधा'
SIR की समय सीमा 7 फरवरी से बढ़ाकर 14 फरवरी कर दी गई है। इसी बीच, रविवार को केवल एक भाजपा नेता के लिए सरकारी मशीनरी के इस इस्तेमाल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हमलावर होने का मौका दे दिया है। टीएमसी नेतृत्व का आरोप है कि चूंकि सुदीप्त भाजपा समर्थक है तो भाजपा और चुनाव आयोग के बीच सांठगांठ है और यह घटना उसी का प्रमाण है। जहां एक ओर इसे एक नागरिक के मताधिकार की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे 'विशेष सुविधा' बताकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।