

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अपेक्षाएं सामने आई हैं। वुडलैंड्स मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ रूपक बरुआ ने कहा है कि आगामी बजट में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च (केंद्र और राज्यों को मिलाकर) को मौजूदा जीडीपी के 1.8 प्रतिशत से बढ़ाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य 2.5 प्रतिशत की दिशा में ठोस और विश्वसनीय मार्ग पर लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ा हुआ स्वास्थ्य खर्च केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा लाभ ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के रूप में दिखना चाहिए। इसके तहत पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के जरिए जिला स्तर पर डायग्नोस्टिक्स, ऑन्कोलॉजी और क्रिटिकल केयर सेवाओं का विस्तार किया जाना आवश्यक है। साथ ही, एबीडीएम (आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन) से जुड़ा एक मजबूत टेलीमेडिसिन नेटवर्क विकसित करने पर जोर दिया गया, जिससे मरीजों को अनावश्यक यात्रा और बार-बार जांच कराने की परेशानी से राहत मिल सके।
रूपक बरुआ ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों का आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च अभी भी कुल स्वास्थ्य व्यय का लगभग 39 प्रतिशत है, जो चिंता का विषय है। ऐसे में बजट के जरिए वित्तीय उपाय बेहद अहम हो जाते हैं। उन्होंने जीएसटी युक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां अधिकांश दवाओं पर 5 प्रतिशत और कुछ जीवनरक्षक दवाओं पर शून्य प्रतिशत जीएसटी लागू है, वहीं अब कैंसर उपचार से जुड़ी दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में और राहत दी जानी चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने उच्च श्रेणी के आयातित चिकित्सा उपकरणों पर लगने वाले शुल्क को कम करने की मांग की। वर्तमान में मेडिकल डिवाइसेज़ पर 7.5 से 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी के साथ 5 प्रतिशत हेल्थ सेस लगाया जाता है, जिसे घटाने से उन्नत इलाज सुलभ और किफायती हो सकता है। बीमा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा को केवल अस्पताल में भर्ती तक सीमित न रखकर ओपीडी और डायग्नोस्टिक सेवाओं तक विस्तारित किया जाना चाहिए। साथ ही, नर्सिंग और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के कौशल विकास में निवेश को भी प्राथमिकता देने की जरूरत है।
रूपक बरुआ ने उम्मीद जताई कि आने वाला बजट स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने तथा आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।