लोकसभा सीटें बढ़ाने और महिला आरक्षण पर सरकार का पक्ष साफ

किरण रिजिजू बोले—राज्यों का प्रतिनिधित्व नहीं बदलेगा, विपक्ष के आरोप बेबुनियाद
लोकसभा सीटें बढ़ाने और महिला आरक्षण पर सरकार का पक्ष साफ
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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों के लागू होने के बाद भी सभी राज्यों का अनुपातिक प्रतिनिधित्व पहले जैसा ही बना रहेगा।

रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को किसी राजनीतिक एजेंडे से जोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चुनाव से पहले यह कदम उठाती है तो उस पर फायदा लेने का आरोप लगता है, और अगर इंतजार किया जाए तो इसे चुनाव से जोड़ दिया जाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल पहले से पारित कानून को लागू करने का मामला है, न कि कोई नया राजनीतिक कदम।

लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि के सवाल पर रिजिजू ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों का बढ़ना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि भारत में एक सांसद औसतन 25 से 27 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जो अन्य लोकतांत्रिक देशों की तुलना में काफी अधिक है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम में एक सांसद करीब 70 हजार लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि वहां 600 से अधिक सांसद हैं। वहीं भारत में अभी केवल 543 सांसद हैं, जबकि जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

जनगणना और परिसीमन को लेकर उठ रहे सवालों पर रिजिजू ने कहा कि अगर इन प्रक्रियाओं का इंतजार किया गया तो 2029 तक महिला आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि जाति आधारित जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं, क्योंकि इसमें व्यापक डेटा संग्रह और सार्वजनिक सुनवाई शामिल होती है।

सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाना और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है, जबकि विपक्ष इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बता रहा है।

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