कोलकाता में खुलेगी पहली चीनी 'हेरिटेज गैलरी'

चाइनाटाउन के 200 साल पुराने इतिहास को मिलेगा नया पहचान
चाइनाटाउन, कोलकाता
चाइनाटाउन, कोलकाता
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कोलकाता : टिरेटा बाजार की गलियों में सुबह की हलचल, चीनी नाश्ते की खुशबू और टांगरा की पुरानी बस्तियों के बीच कोलकाता के चाइनाटाउन की कहानी आज भी सांस लेती है। यह महज एक मोहल्ला नहीं, बल्कि दो सौ साल से अधिक पुराने उस सफर की निशानी है, जिसमें प्रवास, कारोबार और संस्कृतियों का मेल शहर की पहचान बना। अब इस इतिहास को एक स्थायी ‘घर’ मिलने जा रहा है।

ब्लैक बर्न लेन स्थित चीनी कम्युनिटी क्लब में ‘चीनाापाड़ा हेरिटेज गैलरी’ का उद्घाटन 5 सितंबर को होगा। कोलकाता में चीन के महावाणिज्यदूत शू वेई इसका उद्घाटन करेंगे। आम लोगों के लिए गैलरी 6 सितंबर से खुलेगी। इसे शहर के चीनी समुदाय के इतिहास को समर्पित पहली गैलरी बताया जा रहा है।

यहां इतिहास किताबों में बंद नहीं होगा, बल्कि तस्वीरों, दस्तावेजों और समुदाय के सदस्यों की स्मृतियों से जीवंत होगा। दंत चिकित्सा और बढ़ईगीरी के पुराने औजारों के साथ गोंग, अगरबत्ती, मोमबत्तियां और पारंपरिक दीप-स्टैंड उस जीवन की झलक देंगे, जो कभी कोलकाता की रोजमर्रा की धड़कन का हिस्सा था।

इस पहल में INTACH और सिंगापुर स्थित The CHA Project सहयोग कर रहे हैं। उद्देश्य टिरेटा बाजार और कभी ‘ग्रे टाउन’ कहे जाने वाले इलाके की बहुसांस्कृतिक विरासत को फिर सामने लाना है।

इस कहानी की जड़ें 1778 के अचिपुर तक जाती हैं, जहां चीनी व्यापारी यांग दाझाओ, जिन्हें ‘अटच्यू’ कहा जाता था, पहुंचे थे। बाद में चीनी समुदाय बोउबाजार और टांगरा तक फैल गया।

भारत-चीन सांस्कृतिक संवाद की बात हो तो रवींद्रनाथ टैगोर की 1924 की चीन यात्रा भी याद आती है। उन्होंने दोनों सभ्यताओं के बीच संवाद को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर रखा। चीनी कवि शू झिमो से उनका साहित्यिक जुड़ाव उस सांस्कृतिक रिश्ते का सुंदर अध्याय था।

कभी यहां चीनी मूल के करीब 20 हजार लोग रहते थे, आज संख्या लगभग 2 हजार है। फिर भी उनकी संस्कृति जीवित है। अब गैलरी के बाद टिरेटा बाजार की प्रसिद्ध रविवार सुबह वाली चीनी ब्रेकफास्ट स्ट्रीट को भी नये रूप में जीवंत करने की तैयारी है—यानी इतिहास अब सिर्फ याद नहीं रहेगा, फिर से जिया जाएगा।

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