

सन्मार्ग संवाददाता
हुगली : उच्च माध्यमिक परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले परीक्षार्थियों को राहत नहीं मिली है। श्रीरामपुर में नए मतदाताओं के एसआईआर (Special Identification Report) दर्ज करने की सुनवाई के लिए बुलाए जाने से छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 12 फरवरी से होने वाली परीक्षा से पहले ही कई विद्यार्थियों को लंबी कतारों में घंटों खड़ा होना पड़ा, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी प्रभावित हुई।
चांपदानी और उत्तरपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के नए मतदाताओं के 6 नंबर फॉर्म भरने की प्रक्रिया के लिए एसडीओ कार्यालय में सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं। इस कतार में कई उच्च माध्यमिक परीक्षार्थी भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि कतार में खड़े रहने के कारण परीक्षा की अंतिम तैयारी का समय व्यर्थ चला गया। छात्रों ने प्रशासन से अपील की है कि परीक्षा से पहले उनके लिए कोई विशेष प्रबंध किया जाए ताकि उनका समय व्यर्थ न जाए और वे परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह ध्यान दे सकें।
अधिकारियों ने बताया कि मतदाता पंजीकरण और नाम दर्ज कराने के लिए एसआईआर के लिए उपस्थित होना अनिवार्य है। हालांकि, छात्रों की कठिनाइयों को देखते हुए प्रशासन ने सुविधा प्रदान करने की योजना बनाई है। इसके तहत समय निर्धारण और कतार प्रबंधन को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि छात्रों को अत्यधिक समय न लगना पड़े।
परीक्षार्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी और मतदाता पंजीकरण दोनों को संतुलित करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। लंबी कतारों में खड़े रहने और परीक्षा की तैयारी के बीच तनाव और चिंता बढ़ रही है। इससे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। कई छात्रों ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी प्रक्रियाओं का समय परीक्षा के बाद या छुट्टियों के दौरान रखा जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा से पहले ऐसी परेशानियां छात्र की मनोस्थिति और प्रदर्शन पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए समय और संसाधनों का प्रबंधन करे।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आगामी दिनों में कतार प्रबंधन और प्रक्रिया को सरल बनाने के उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा छात्रों को परीक्षा के लिए पर्याप्त समय और तैयारी की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन और चुनाव आयोग दोनों इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि मतदाता पंजीकरण अनिवार्य होने के बावजूद विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।