काउंटिंग के दिन सड़कों की वीरानी बनी बड़ी परेशानी

आवागमन ठप, रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा असर
काउंटिंग के दिन सड़कों की वीरानी बनी बड़ी परेशानी
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100-150 का किराया बढ़कर हुआ 300-400 रुपये

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना के दिन शहर की सड़कों पर असामान्य सन्नाटा देखने को मिला। आम दिनों में जहां ट्रैफिक और लोगों की भीड़ रहती है, वहीं इस दिन सड़कें लगभग खाली रहीं। सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक इंतजामों के चलते कई रास्तों को बंद कर दिया गया था, जिससे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर ऑफिस जाने वाले और दैनिक कामकाज करने वाले लोगों के लिए यह दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।

परिवहन सेवाएं हुईं प्रभावित, यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी

काउंटिंग के दिन सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित रहीं। कई बस रूट या तो बंद कर दिए गए थे या बहुत कम संख्या में बसें चल रही थीं। इससे यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। कुछ यात्रियों का कहना था कि जो बसें चल भी रही थीं, उनमें भीड़ इतनी ज्यादा थी कि चढ़ना मुश्किल हो गया। इसके अलावा, निजी कैब सेवाओं जैसे रैपिडो और उबर की मांग अचानक बढ़ गई। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कई ड्राइवरों ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया। जहां सामान्य दिनों में किराया कम होता है, वहीं इस दिन कई लोगों से दोगुना या उससे भी अधिक पैसे मांगे गए। कुछ यात्रियों ने बताया कि जहां सामान्य दिनों में किराया 100 से 150 रुपये होता है, वहीं इस दिन उनसे 300 से 400 रुपये तक मांगे गए जिसके कारण उन्हें अपनी बुकिंग कैंसिल करनी पड़ी।

आम लोगों की राय : मजबूरी में उठाना पड़ा अतिरिक्त खर्च

टाॅलीगंज के निवासी राहुल शर्मा ने बताया कि मुझे ऑफिस पहुंचना बहुत जरूरी था, लेकिन कोई साधन नहीं मिल रहा था। आखिरकार मुझे एक कैब लेनी पड़ी, जिसके लिए मुझे काफी ज्यादा पैसे देने पड़े। वहीं, एक अन्य यात्री पूजा वर्मा ने कहा, “रैपिडो और उबर वालों ने इस मौके का खूब फायदा उठाया। मजबूरी में हमें ज्यादा पैसे देने पड़े क्योंकि और कोई विकल्प नहीं था।”

प्रशासन के इंतजामों पर उठे सवाल

हालांकि सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन के कदम जरूरी थे, लेकिन आम लोगों को हुई असुविधा को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। लोगों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण दिनों पर बेहतर परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी, ताकि आम जनता को इतनी परेशानी का सामना न करना पड़े। कुल मिलाकर, काउंटिंग के दिन जहां एक ओर चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों के लिए यह दिन मुश्किलों से भरा रहा।

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