

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
आगरपाड़ा : पश्चिम बंगाल में 'SIR' की एक पुकार ने चिकित्सा जगत से लेकर प्रशासनिक हलकों तक में हलचल पैदा कर दी है। इस बुलावे का सम्मान करते हुए बांकुड़ा के डिप्टी सीएमओएच (Dy CMOH) डॉक्टर सजल विश्वास अपनी ड्यूटी और मरीजों को छोड़कर सीधे आगरपाड़ा के सावित्री महाजाति बालिका विद्यापीठ में लाइन में खड़े नजर आए। हैरानी की बात यह है कि इस बुलावे पर केवल डॉक्टर सजल ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार पहुंचा था। इसमें उनके वृद्ध माता-पिता के अलावा उनके दो अन्य भाई भी शामिल थे।
एक ही परिवार के तीन डॉक्टर भाइयों को 'SIR' का बुलावा
परिवार के तीनों भाई चिकित्सा क्षेत्र में हैं। डॉ. सजल विश्वास जो कि डिप्टी सीएमओएच हैं और 1989 बैच, एनआरएस मेडिकल कॉलेज से हैं और फिलहाल बांकुड़ा में तैनात हैं, वहीं उनके भाई डॉ. स्वपन विश्वास भाटपाड़ा स्टेट जनरल हॉस्पिटल (1992 बैच) में मेडिकल ऑफिसर हैं। उनके ही भाई डॉ. तापस विश्वास पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल और वर्तमान आईसीयू हेड (1987 बैच) हैं। इतने उच्च पदों पर आसीन होने के बावजूद, ये सभी डॉक्टर किसी आम नागरिक की तरह केंद्र पर कतार में खड़े रहे। इनके साथ इनके बुजुर्ग माता-पिता और एक अन्य भाई भी मौजूद थे।
लिस्ट में नाम क्यों नहीं, असमंजस में है परिवार
परिवार में असमंजस की स्थिति तब पैदा हुई जब उन्हें यह समझ नहीं आया कि आखिर उन्हें किस आधार पर वहां बुलाया गया है। डॉक्टर भाइयों का कहना है कि वे इस बात को लेकर बेहद हैरान हैं कि उनका नाम '2002' की सूची में क्यों नहीं है और अचानक इस तरह की प्रक्रिया के लिए उन्हें क्यों तलब किया गया। हालांकि परिवार ने सुनवाई को लेकर सभी तरह से सहयोग करने की बात कही। डॉ. सजल विश्वास जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का बांकुड़ा से सीधे आगरपाड़ा पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। साथ ही इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और डेटा मैनेजमेंट पर भी सवाल खड़े हो गये हैं।