

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कलकत्ता पिंजरापोल सोसाइटी की कल्याणी शाखा में स्थित प्राचीन अपराध भंजन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं उद्घाटन समारोह रविवार को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर परमहंस स्वामी गिरीशानंद जी ने उद्घाटन करते हुए आशीर्वचन दिए। स्वामी जी ने कहा कि हमारे शास्त्रों में लिखा है कि अपराध भंजन की दो शर्तें हैं – पहले व्यक्ति अपने पिछले अपराधों की गलती स्वीकार करे और फिर उसे दोबारा न करने की प्रतिज्ञा करे। यह पहला प्राचीन मंदिर है जिसे मैंने अपराध भंजन के नाम से देखा है। नए मंदिर बनाने से अधिक पुण्य किसी पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार और भव्य निर्माण करने में मिलता है। संत उदित महाराज (वृंदावन) ने सजन बंसल के पिताश्री पुण्यश्लोक साधुराम बंसल की सेवा भावना और धर्मनिष्ठा की प्रशंसा करते हुए कहा कि साधु के घर में तो सज्जन ही रहते हैं। मंदिर जीर्णोद्धार का मुख्य प्रेरक सजन बंसल ने कहा कि संतों एवं पूर्वजों के मार्गदर्शन ने उन्हें धर्म के मार्ग पर चलना सिखाया, और यही कारण है कि उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कर अपने दायित्व को निभाया।
कल्याणी शाखा के मंत्री सुरेंद्र कुमार पटवारी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रधान अतिथि मुरारी लाल दीवान और संस्था के अध्यक्ष रमेश कुमार सरावगी ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के संयुक्त मंत्री राजकमल बांगड़ के गीत एवं गोपूजन से हुआ। इसका कुशल संचालन समाजसेवी सुभाष मुरारका ने किया। समारोह के उपरांत संतों ने कल्याणी गोशाला का दौरा किया। कार्यक्रम में गौरीशंकर कालुका, मीरा बंसल, बीएसएफ कमांडेंट मनोज राय, कमल कुमार केडिया, चंद्र शेखर अग्रवाल, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, प्रमोद गुप्ता, संदीप कुमार तुलस्यान, डॉ. अरुण उपाध्याय, आनंद लड़िया, शंकर लाल पोद्दार, प्रदीप जयदेवका, संजय रावका सहित व अन्य गणमान्य उपस्थित थे।