माकपा ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति की मांग दोहरायी

500 करोड़ के फर्जी ऋण के बाद संकट
माकपा ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति की मांग दोहरायी
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विश्वास बहाली के लिए नया प्रबंधन जरूरी

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने अंडमान एवं निकोबार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड में प्रबंध निदेशक और महाप्रबंधक के पदों पर कम से कम आगामी दो से तीन वर्षों के लिए वरिष्ठ एवं अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति की मांग एक बार फिर दोहराई है। पार्टी का कहना है कि ऐसा कदम बैंक की कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार लाने और लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक है।

अंडमान एवं निकोबार राज्य सचिव डी. अय्यप्पन ने 6 नवंबर 2025 को उपराज्यपाल को लिखे गए अपने पूर्व पत्र की याद दिलाते हुए प्रशासन का ध्यान राज्य सहकारी बैंक की कार्यप्रणाली में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता की ओर आकर्षित किया। उन्होंने पत्र में बताया कि बैंक के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक और कुछ निदेशकों को अंडमान एवं निकोबार पुलिस तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के बाद लगभग 500 करोड़ रुपये के फर्जी ऋण स्वीकृति मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

अय्यप्पन ने कहा कि वर्तमान में कार्यवाहक प्रबंध निदेशक और महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत अधिकारी भी पुलिस और ईडी की जांच के दायरे में हैं। माकपा का मानना है कि मौजूदा प्रबंधन टीम के साथ बैंक का पुनरुद्धार संभव नहीं है क्योंकि वर्तमान प्रबंधन की विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है।

इसलिए पार्टी ने सुझाव दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी बैंक से अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाकर बैंक का पेशेवर तरीके से संचालन किया जाए। ऐसा करने से न केवल बैंक की वित्तीय प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि आम जनता का बैंक पर विश्वास भी बहाल होगा।

डी. अय्यप्पन ने यह भी कहा कि बैंक में विश्वास बहाली के उपाय अत्यंत आवश्यक हैं और इसके लिए प्रबंधन में नई व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जल्द से जल्द स्थायी और अनुभवी प्रबंधन नियुक्त किया जाए ताकि बैंक को संकट से बाहर लाया जा सके और भविष्य में वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि बैंक की पुनर्स्थापना और विश्वास बहाली में नए प्रबंधन की भूमिका निर्णायक होगी। इसके बिना न केवल बैंक के संचालन में सुधार संभव नहीं है, बल्कि भविष्य में वित्तीय असुरक्षा और ग्राहकों का विश्वास खोने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

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