

नयी दिल्ली : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने में समय लगेगा और इसके लिए राजनीतिक दलों को मिलकर प्रयास करना होगा।
एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में अपनी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव’ के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को समान अवसर नहीं मिले हैं। उनके अनुसार, सरकार का निर्वाचन आयोग और मुख्यधारा के मीडिया पर नियंत्रण है।
उन्होंने कांग्रेस के संघर्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि पार्टी संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने चुनावों में धांधली होने का आरोप भी लगाया और विपक्षी एकजुटता से पार्टी की संभावनाएं बेहतर होने की बात कही।
आपातकाल पर सोनिया गांधी ने कहा कि उस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती हुई और बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार पर रोक लगी, लेकिन ये कदम संवैधानिक तरीके से उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ते हालात और व्यापक विरोध से निपटने की कोशिश कर रही थीं।
हालांकि, बाद में इंदिरा गांधी ने आपातकाल की ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया और माफी भी मांगी थी। सोनिया गांधी का 544 पन्नों का संस्मरण 10 नवंबर को हार्पर कॉलिन्स इंडिया प्रकाशित करेगा। इसमें उनके बचपन, राजीव गांधी से विवाह, पारिवारिक त्रासदियों और राजनीतिक जीवन के अनुभवों का उल्लेख है।