

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कौशिकी अमावस्या पर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार की शाम कालीघाट मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद सीएम मंदिर परिसर में फर्श पर बैठे और तली हुई मछली और बसंती पुलाव वाला भोग ग्रहण किया। बाद में सीएम ने कहा कि शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, को अपनी निजी राय व्यक्त करने का हक है और लोग इसे मानने या न मानने के लिए स्वतंत्र हैं। एक संत ने अपनी राय व्यक्त की है। सीएम ने कहा कि ‘‘हाल ही में एक संत हमारे राज्य में आए थे और उन्होंने देशभक्ति, राष्ट्रवाद, एकजुट राष्ट्र और इस देश की परंपरा और संस्कृति के आदर्शों के बारे में अपने तरीके से बात की थी। उन्होंने किसी पर कुछ भी थोपा नहीं लेकिन मैंने कुछ लोगों को भवानीपुर थाने के सामने उनकी तस्वीरें जलाते हुए देखा। हम इस राज्य में ऐसी गतिविधियों को और बर्दाश्त नहीं करेंगे। यहां तुष्टीकरण की राजनीति बहुत हो चुकी है।’’
सीएम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं एक सनातनी हिंदू हूं। महाअष्टमी पर जब मैं मां दुर्गा की पूजा करता हूं, तो सात्विक भोजन करता हूं। कार्तिक महीने में भी मैं सात्विक भोजन ही करता हूं। साथ ही, मैं मां काली को बलि चढ़ाये जाने वाले बकरे का मांस भी खाता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज मंदिर में जो भोग चढ़ाया गया था, उसमें मछली का मूरा, तली हुई मछली और बसंती पुलाव शामिल था। मैंने वही खाया।’’ कालीघाट में देवी काली को मछली और मांस का भोग लगाया जाता है। यह एक ऐसी धार्मिक परंपरा को दर्शाता है जिसमें मांसाहारी भोजन भोग का हिस्सा होता है।