मत्स्य अवसंरचना परियोजना की स्वीकृति पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जताया आभार

मायाबंदर में स्मार्ट फिशिंग हार्बर को मिली मंजूरी
मत्स्य अवसंरचना परियोजना की स्वीकृति पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जताया आभार
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पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत 199 करोड़ की परियोजना

अंडमान में मछुआरा समुदाय के लिए नयी सुविधाएं

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : भारतीय जनता पार्टी, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार तिवारी ने मायाबंदर में स्मार्ट एवं एकीकृत फिशिंग हार्बर परियोजना की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से विशेषकर मछुआरा समुदाय और इससे जुड़े व्यवसायियों में उत्साह का माहौल है और यह परियोजना द्वीपसमूह में मत्स्य अवसंरचना के अभूतपूर्व विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी। भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अधीन मत्स्य पालन विभाग ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के ‘मायाबंदर में स्मार्ट और एकीकृत फिशिंग हार्बर के विकास’ प्रस्ताव को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ 199.24 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर स्वीकृति प्रदान की है। ब्लू पोर्ट पहल के अनुरूप विकसित होने वाला यह स्मार्ट फिशिंग हार्बर सुरक्षित लैंडिंग और बर्थिंग सुविधाओं से सुसज्जित होगा, जिसमें नवीनतम तकनीक और आईओटी आधारित प्रणालियां शामिल होंगी। यह परियोजना सतत मत्स्य प्रबंधन, मछली हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि, परिचालन सुरक्षा, ऊर्जा दक्ष प्रणालियों और डिजिटल ट्रेसबिलिटी को एकीकृत करेगी। इससे रोजगार सृजन, हितधारकों की आय में वृद्धि, आजीविका सुदृढ़ीकरण और अवैध, अपंजीकृत एवं अनियमित मत्स्य शिकार पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी। परियोजना के तहत 430 मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध होंगी और प्रतिवर्ष 9,900 टन मछली लैंडिंग की क्षमता विकसित की जाएगी। अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के पास 6 लाख वर्ग किलोमीटर का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और लगभग 60,000 मीट्रिक टन ट्यूना संसाधन उपलब्ध हैं। निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नवंबर 2024 में स्वराज द्वीप में निवेशक सम्मेलन आयोजित किया गया था। पीएमएमएसवाई के अंतर्गत द्वीपसमूह में ट्यूना क्लस्टर भी अधिसूचित किया गया है। भारत का मत्स्य क्षेत्र बीते दशक में तीव्र गति से बढ़ा है और 2030-31 तक एक लाख करोड़ रुपये के समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्य की दिशा में मायाबंदर परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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