कम वर्षा के बीच जल संरक्षण के लिए प्रशासन ने जनता से मांगा सहयोग

मानसून की कमी से जल संकट की आशंका
कम वर्षा के बीच जल संरक्षण के लिए प्रशासन ने जनता से मांगा सहयोग
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प्रशासन कर रहा है स्थिति की सतत निगरानी

जलाशयों और भूजल स्तर पर पड़ा प्रतिकूल प्रभाव

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान इस वर्ष अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा स्थिति की लगातार निगरानी रखी जा रही है। वर्षा में आई इस कमी का प्रतिकूल प्रभाव जलाशयों के जलस्तर, भूजल पुनर्भरण तथा अन्य सतही जल स्रोतों पर पड़ा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले महीनों में पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं। प्रशासन ने सभी नागरिकों, संस्थानों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से उपलब्ध जल संसाधनों के संरक्षण में सहयोग की अपील की है। जनता से अनुरोध किया गया है कि पेयजल का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों जैसे पीने, भोजन पकाने और बुनियादी स्वच्छता तक ही सीमित रखा जाए। प्रशासन ने गैर-आवश्यक जल उपयोग, जैसे वाहनों की धुलाई, बगीचों में अत्यधिक पानी देने और इसी प्रकार की अन्य गतिविधियों से परहेज करने का आग्रह किया है, ताकि सामुदायिक आवश्यकताओं के लिए जल का संरक्षण किया जा सके। नागरिकों और प्रतिष्ठानों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने आंतरिक जल आपूर्ति ढांचे का समय पर रखरखाव सुनिश्चित करें।

टपकते नल, पाइपलाइन और फिटिंग्स की शीघ्र मरम्मत से अनावश्यक जल बर्बादी में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और संरक्षण के प्रयासों को बल मिलेगा। निर्माण एजेंसियों से अपील की गई है कि वे अपनी जल आवश्यकताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करें और निर्माण कार्यों में पाइपलाइन से मिलने वाले पेयजल का उपयोग न करें, ताकि घरेलू जरूरतों के लिए जल की उपलब्धता बनी रहे। प्रशासन स्थिति पर सतत नजर बनाए हुए है, ताकि जल का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी और जिम्मेदार उपयोग अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन ने जल अपव्यय से बचने के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की है। जिम्मेदार उपयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से मानसून की कमी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

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